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Up kiran,Digital Desk : ज्योतिष शास्त्र में रत्नों को ग्रहों की ऊर्जा का संवाहक माना गया है। कई लोग शौक के तौर पर या जानकारी के अभाव में रत्न को बार-बार उतारते और पहनते रहते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि आपकी यह आदत रत्न के सकारात्मक प्रभाव को पूरी तरह खत्म कर सकती है? आइए जानते हैं रत्न धारण करने से जुड़े वे महत्वपूर्ण नियम, जिनका पालन न करने पर लाभ की जगह नुकसान हो सकता है।

बार-बार रत्न उतारने से क्या होता है?

रत्न विज्ञान के अनुसार, जब हम कोई रत्न धारण करते हैं, तो वह ब्रह्मांड से संबंधित ग्रह की किरणों (Cosmic Rays) को अवशोषित कर हमारे शरीर में संचारित करता है।

रश्मि-विकिरण में बाधा: बार-बार रत्न उतारने से उसकी रश्मि-विकिरण की निरंतरता टूट जाती है, जिससे शरीर को मिलने वाला ऊर्जा प्रवाह बाधित होता है।

पुनः शुद्धीकरण की जरूरत: यदि आप किसी रत्न को सफाई के अलावा अन्य कारणों से एक घंटे से अधिक देर के लिए उतारते हैं, तो उसे दोबारा धारण करने से पहले संबंधित ग्रह के वार के अनुसार शुद्ध और जाग्रत करना अनिवार्य है।

रत्न पहनने से पहले और बाद की जरूरी बातें

खंडित रत्न का त्याग: यदि पहना हुआ रत्न चटक जाए, उसमें दरार आ जाए या उसका रंग फीका (बदरंग) पड़ जाए, तो उसे तुरंत उतार देना चाहिए। खंडित रत्न अशुभ प्रभाव दे सकता है।

उचित धातु का चुनाव: हर रत्न की अपनी एक प्रिय धातु होती है। जैसे पुखराज सोने में और मोती चांदी में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रभाव देते हैं। गलत धातु में पहनने से रत्न की शक्ति कम हो जाती है।

विरोधाभासी रत्न: कभी भी दो शत्रु ग्रहों के रत्नों को एक साथ न पहनें। उदाहरण के लिए, शनि के रत्न नीलम के साथ सूर्य का रत्न माणिक पहनना गंभीर नुकसान का कारण बन सकता है।

शुद्धता और मंत्र: रत्न को केवल पहन लेना काफी नहीं है। उसे विधिपूर्वक मंत्रों के उच्चारण के साथ जाग्रत करके ही धारण करना चाहिए।

इन रत्नों को पहनते समय रहें अधिक सावधान

नीलम और हीरा: शनि का रत्न 'नीलम' और शुक्र का 'हीरा' अत्यंत प्रभावशाली होते हैं। ये हर किसी को सूट नहीं करते। इन्हें स्थायी रूप से पहनने से पहले 2-3 दिन तक अपने पास रखकर 'टेस्ट' जरूर करना चाहिए। यदि नींद खराब हो या बेचैनी बढ़े, तो इन्हें धारण न करें।

उपरत्न का विकल्प: यदि आप महंगे रत्न खरीदने में असमर्थ हैं, तो उनके उपरत्न (Substitutes) भी पहन सकते हैं। वे कीमत में कम होने के बावजूद अपना कार्य बखूबी करते हैं।

कब नहीं मिलता रत्न का लाभ?

अगर रत्न चोरी किया हुआ, छीना हुआ या रास्ते में मिला हुआ हो।

अगर आपने रत्न की उचित कीमत नहीं चुकाई है।

यदि आप रत्न और ईश्वर में आस्था नहीं रखते हैं।

विशेष टिप: रत्न असली है या नकली, इसकी पहचान हमेशा किसी अनुभवी लैब सर्टिफिकेट या एक्सपर्ट की सलाह से ही करें। रत्न धारण करने के बाद अपनी क्षमता अनुसार दान-पुण्य करना इसके प्रभाव को कई गुना बढ़ा देता है।