img

Up Kiran, Digital Desk: राजस्थान में सर्दी का प्रकोप बढ़ता ही जा रहा है। राज्य के विभिन्न हिस्सों में ठंड का असर काफी बढ़ चुका है। रविवार को मौसम विभाग ने 5 जिलों में शीतलहर और 9 जिलों में घने कोहरे की चेतावनी दी है। वहीं शनिवार को अधिकांश स्थानों पर न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से नीचे चला गया। खासकर माउंट आबू में सर्दी ने रिकॉर्ड तोड़ दिया, जहां तापमान शून्य डिग्री तक पहुँच गया। शेखावाटी और जयपुर संभाग के जिलों में भी सर्द हवाओं के कारण ठिठुरन में इजाफा हुआ है। मौसम विभाग ने आगामी सप्ताह में और भी सर्दी, शीतलहर और कोहरे का पूर्वानुमान जताया है।

माउंट आबू के बाद फतेहपुर सबसे ठंडा

राज्य के उत्तर-पूर्वी और उत्तर-दक्षिणी क्षेत्रों में पिछले 24 घंटों में घना कोहरा छाया रहा, जिससे दिन में भी सर्दी महसूस की गई। माउंट आबू के बाद फतेहपुर (सीकर) को सबसे ठंडा स्थान माना गया, जहां न्यूनतम तापमान 2.3 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। इसके साथ ही फतेहपुर, सीकर और अलवर के ग्रामीण क्षेत्रों में पाला पड़ने से किसानों की परेशानियां बढ़ गई हैं। ठंडी हवाओं और कोहरे के कारण उनके खेतों में फसलें प्रभावित हो रही हैं, जिससे उनकी चिंताएं और बढ़ गई हैं।

शीतलहर और कोहरे के कारण सामान्य से 4 डिग्री कम रहा अधिकतम तापमान

सर्दी और कोहरे के कारण सूर्य की रोशनी कम पड़ रही है, जिससे अधिकांश स्थानों पर अधिकतम तापमान सामान्य से लगभग 4 डिग्री नीचे रहा। पिलानी (झुंझुनूं) में तो अधिकतम तापमान केवल 15.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज हुआ, जो सबसे ठंडा रहा। जयपुर, सीकर, श्रीगंगानगर, कोटा, अलवर, अजमेर और अन्य शहरों में अधिकतम तापमान 16 से 20 डिग्री सेल्सियस के बीच रहा।

अगले एक सप्ताह तक सर्दी का असर जारी रहेगा

मौसम विभाग के प्रमुख राधेश्याम शर्मा के अनुसार, राज्य में अगले एक सप्ताह तक सूखा मौसम रहेगा, साथ ही सर्दी, शीतलहर और कोहरे का असर बना रहेगा। अगले 2-3 दिन में कुछ क्षेत्रों में घना कोहरा छा सकता है और न्यूनतम तापमान में 1 से 2 डिग्री की और गिरावट हो सकती है। उत्तर राजस्थान में शीतलहर का असर जारी रहेगा और कुछ स्थानों पर कोल्ड-डे की स्थिति बन सकती है।

किसानों के लिए चुनौती

इस मौसम का सबसे अधिक असर राज्य के किसानों पर पड़ा है। पाला और ठंडी हवाओं के चलते फसलों की बर्बादी का खतरा बढ़ गया है। खासकर गेहूं, सरसों और अन्य ठंडी मौसम में उगने वाली फसलों को नुकसान हो सकता है। किसानों को मौसम के बदलाव के हिसाब से अपनी फसलों को बचाने के उपायों पर ध्यान देना होगा।