Up Kiran,Digital Desk: वास्तु शास्त्र के अनुसार, घर का मुख्य द्वार न केवल घर का प्रवेश स्थल है, बल्कि यह घर की समृद्धि और सुख-शांति का सबसे महत्वपूर्ण स्रोत भी माना जाता है। यदि घर के मुख्य द्वार की दिशा सही नहीं है, तो न केवल घर की ऊर्जा प्रभावित होती है, बल्कि यह परिवार की मानसिक स्थिति, आर्थिक स्थिति और सेहत पर भी नकारात्मक असर डाल सकता है। लेकिन चिंता की बात नहीं है, क्योंकि कुछ आसान और प्रभावी वास्तु उपायों से इन समस्याओं को हल किया जा सकता है। आइए जानते हैं, घर के मुख्य द्वार की दिशा में दोष दूर करने के कुछ कारगर उपाय।
मुख्य द्वार की दिशा का महत्व
वास्तु शास्त्र में यह माना जाता है कि यदि मुख्य द्वार दक्षिण, दक्षिण-पश्चिम या पश्चिम दिशा में है, तो नकारात्मक ऊर्जा का प्रवेश होता है। इससे घर में मानसिक तनाव, आर्थिक संकट और स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। इसके विपरीत, उत्तर-पूर्व और पूर्व दिशा को शुभ माना जाता है। इन दिशाओं में मुख्य द्वार होना घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह सुनिश्चित करता है। हालांकि, अगर दिशा बदलना संभव नहीं है, तो कुछ सरल उपायों से इस दोष को कम किया जा सकता है।
वास्तु उपाय: ऊर्जा का संतुलन साधें
स्वास्तिक, ॐ और गणेश यंत्र का महत्व
वास्तु के विशेषज्ञ यह मानते हैं कि मुख्य द्वार पर स्वास्तिक, ॐ और गणेश जी के चित्र या यंत्र का प्रयोग नकारात्मक ऊर्जा को रोकने का प्रभावी तरीका है। स्वास्तिक और ॐ चिन्ह घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं, जबकि गणेश जी के यंत्र से घर में आने वाली बाधाएं समाप्त होती हैं।
उपाय: मुख्य द्वार पर स्वास्तिक और ॐ का चित्र तांबे, चांदी या लकड़ी पर बनवाकर लगाएं। गणेश यंत्र या मूर्ति को द्वार के पास रखें और रोजाना पूजा करें। इस साधारण उपाय से दिशा दोष का असर काफी हद तक कम हो सकता है।
पिरामिड और घंटी: नकारात्मक ऊर्जा को दूर करें
वास्तु में तांबे या पीतल के पिरामिड का प्रयोग मुख्य द्वार पर नकारात्मक ऊर्जा को संतुलित करने के लिए किया जाता है। पिरामिड घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बढ़ाता है। इसके अलावा, घंटी या विंड चाइम का प्रयोग भी लाभकारी होता है, क्योंकि इनकी आवाज से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
उपाय: मुख्य द्वार के ऊपर पिरामिड रखें और दरवाजे के पास एक छोटी घंटी या विंड चाइम लटकाएं। जब भी दरवाजा खुले या बंद हो, तो यह ध्वनि सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करेगी।
दर्पण का प्रयोग: ऊर्जा का पुनर्निर्देशन
यदि मुख्य द्वार दक्षिण या दक्षिण-पश्चिम में है, तो वास्तु शास्त्र के अनुसार, द्वार के सामने दीवार पर दर्पण लगाना एक अच्छा उपाय हो सकता है। दर्पण नकारात्मक ऊर्जा को बाहर की ओर प्रतिबिंबित करता है, जिससे घर में ऊर्जा का संतुलन बना रहता है।
उपाय: मुख्य द्वार के सामने गोल या आयताकार दर्पण लगाएं, लेकिन यह सुनिश्चित करें कि दर्पण का प्रतिबिंब मुख्य द्वार पर न पड़े। इसके साथ ही, हनुमान जी की तस्वीर या यंत्र भी लगाएं। हनुमान जी की उपासना से नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव कम होता है।
_1737225010_100x75.png)
_723656680_100x75.png)
_828056804_100x75.png)
_2067004285_100x75.png)
_1964076631_100x75.png)