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Death toll in violence on Syria: मुल्क-ए-शाम यानि सीरिया में सरकारी बलों और राष्ट्रपति बशर अल-असद के समर्थकों के बीच हिंसा बेकाबू हो गई है। गुरुवार (6 मार्च 2025) से जारी इस संघर्ष में अब तक 1000 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं। जो मुस्लिम हैं। ये घटना सीरिया के 14 साल पुराने गृहयुद्ध में सबसे घातक झड़पों में से एक मानी जा रही है।

ब्रिटेन स्थित मानवाधिकार संगठन सीरियन ऑब्जर्वेटरी फॉर ह्यूमन राइट्स के मुताबिक, मरने वालों में 745 आम नागरिक शामिल हैं, जिनमें से अधिकतर को नजदीक से गोली मारी गई। इसके अलावा, 125 सरकारी सुरक्षाकर्मी और असद से जुड़े 148 लड़ाके भी मारे गए हैं।

ऐसे भड़की हिंसा

ताजी रिपोर्ट मुताबिक, ये हिंसा तब भड़की जब सरकारी सुरक्षा बलों ने जबलेह के पास एक व्यक्ति को हिरासत में लेने की कोशिश की। मगर असद समर्थकों ने सुरक्षा बलों पर घात लगाकर हमला कर दिया। इसके बाद लताकिया प्रांत के बड़े हिस्से में बिजली और पीने का पानी भी बंद कर दिया गया।

शुक्रवार (7 मार्च 2025) को हिंसा और तेज हो गई, जब सरकार समर्थक सुन्नी मुस्लिम बंदूकधारियों ने पूर्व राष्ट्रपति असद के अल्पसंख्यक संप्रदाय "अलावी" के लोगों को निशाना बनाया। इस संघर्ष ने हयात तहरीर अल-शाम (HTS) के लिए नई चुनौती खड़ी कर दी है, जो कभी असद के शासन को उखाड़ फेंकने में शामिल था।

हिंसा की भयावहता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि हमलावरों ने पहले लोगों के पहचान पत्र देखे और फिर उनकी हत्या कर दी।

 

 

 

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