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Up kiran,Digital Desk : बिहार की सियासत में इस वक्त जबरदस्त उबाल है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के इतिहास में पहली बार 'अपना मुख्यमंत्री' चुनने की घड़ी अब बेहद करीब आ गई है। शुक्रवार को देश की राजधानी दिल्ली में भाजपा कोर ग्रुप की एक हाई-प्रोफाइल बैठक बुलाई गई है, जिसमें बिहार के अगले 'कैप्टन' के नाम पर अंतिम मुहर लगनी तय मानी जा रही है। इस बीच, सोशल मीडिया पर कोलकाता से आई एक तस्वीर ने पटना के सियासी गलियारों में कयासों का बाजार गर्म कर दिया है।

कोलकाता की उस एक फोटो ने कैसे बदला सियासी समीकरण?

दरअसल, पश्चिम बंगाल में चुनाव प्रचार के दौरान बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, हरियाणा के सीएम नायब सिंह सैनी और उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य एक साथ नजर आए। इस तस्वीर के सामने आते ही सियासी पंडित इसे 'ओबीसी एकजुटता' और 'कुशवाहा डीएनए' के बड़े संकेत के रूप में देख रहे हैं। चर्चा है कि जिस तरह यूपी और हरियाणा में भाजपा ने पिछड़ों और अति-पिछड़ों को कमान सौंपी है, ठीक वैसा ही फॉर्मूला बिहार में भी लागू हो सकता है। समर्थकों ने इस मुलाकात को 'भाइयों का मिलन' करार देते हुए सम्राट चौधरी की दावेदारी को और मजबूत बताया है।

नीतीश कुमार की विदाई और नए सीएम की ताजपोशी का 'शुभ मुहूर्त'

बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव 10 अप्रैल के बाद दिखाई देगा। मौजूदा मुख्यमंत्री और जेडीयू अध्यक्ष नीतीश कुमार 10 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य के तौर पर शपथ लेंगे। उनके पटना लौटते ही सत्ता हस्तांतरण की प्रक्रिया तेज हो जाएगी। सूत्रों की मानें तो खरमास खत्म होने के बाद 14 अप्रैल (आंबेडकर जयंती) को नई सरकार के शपथ ग्रहण के लिए सबसे शुभ तारीख माना जा रहा है। भाजपा इस खास दिन पर दलित और पिछड़े वर्ग को एक बड़ा संदेश देने की योजना बना रही है।

सीएम की रेस में कौन आगे और किसका नाम दे सकता है सरप्राइज?

हालांकि, मुख्यमंत्री की कुर्सी के लिए सम्राट चौधरी का नाम सबसे प्रबल दावेदार के रूप में उभरा है, लेकिन भाजपा की कार्यशैली को देखते हुए 'सरप्राइज' से इनकार नहीं किया जा सकता। सम्राट चौधरी के अलावा केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय, प्रदेश के मंत्री दिलीप जायसवाल, संजीव चौरसिया और रेणु देवी के नामों पर भी चर्चा जारी है। पार्टी का एक धड़ा आंबेडकर जयंती के मौके पर किसी दलित चेहरे को सीएम बनाकर चौंकाने की बात भी कह रहा है। कमान किसके हाथ में होगी, इसका फैसला दिल्ली में भाजपा संसदीय बोर्ड ही करेगा।