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Up kiran,Digital Desk : बिहार की राजनीति के 'चाणक्य' कहे जाने वाले नीतीश कुमार ने एक बार फिर राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में वापसी की है। दो दशक से अधिक समय के बाद नीतीश कुमार ने राज्यसभा सांसद के रूप में शपथ ली है। इस ऐतिहासिक अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया और सदन में उनकी मौजूदगी को संसदीय गरिमा के लिए महत्वपूर्ण बताया।

दो दशक बाद संसद वापसी: पीएम मोदी का बधाई संदेश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नीतीश कुमार को देश के सबसे अनुभवी नेताओं में से एक बताते हुए उनके सुशासन (Good Governance) के प्रति समर्पण की सराहना की।

पीएम का बयान: "नीतीश कुमार जी का सुशासन के प्रति समर्पण सर्वविदित है। उन्होंने बिहार के विकास में अमूल्य योगदान दिया है। संसद में उनकी वापसी से सदन की चर्चाओं का स्तर बढ़ेगा और सदन की गरिमा में वृद्धि होगी।"

अनुभव का लाभ: पीएम ने उम्मीद जताई कि उनके लंबे प्रशासनिक और राजनीतिक अनुभव का लाभ अब उच्च सदन को प्राप्त होगा।

हरिवंश नारायण सिंह को तीसरी बार राज्यसभा का सम्मान

प्रधानमंत्री ने केवल नीतीश कुमार ही नहीं, बल्कि जदयू के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश नारायण सिंह को भी तीसरी बार उच्च सदन के लिए नामित होने पर बधाई दी।

पीएम ने कहा कि हरिवंश जी एक सम्मानित विचारक और पत्रकार रहे हैं। उनके अनुभव ने राज्यसभा की कार्यवाही को हमेशा मजबूती प्रदान की है।

राष्ट्रपति द्वारा उन्हें फिर से नामित किए जाने पर खुशी जताते हुए पीएम ने उनके आगामी कार्यकाल के लिए शुभकामनाएं दीं।

बिहार की राजनीति में 'बड़ा बदलाव' और नए संकेत

नीतीश कुमार का राज्यसभा जाना केवल एक पद का परिवर्तन नहीं, बल्कि बिहार की राजनीति में एक बड़े सत्ता संतुलन के बदलाव का संकेत माना जा रहा है।

भाजपा के लिए मौका: हालिया विधानसभा चुनाव में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, जबकि जदयू दूसरे स्थान पर रही। अब नीतीश कुमार के केंद्र की राजनीति में आने से बिहार में भाजपा का मुख्यमंत्री बनने का रास्ता लगभग साफ होता नजर आ रहा है।

10 बार मुख्यमंत्री रहने का रिकॉर्ड: नीतीश कुमार ने हाल ही में दसवीं बार बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेकर एक कीर्तिमान स्थापित किया था। अब उनका दिल्ली शिफ्ट होना राज्य की कमान नई पीढ़ी या सहयोगी दल को सौंपने की ओर इशारा है।

राज्यसभा शपथ ग्रहण: मुख्य बिंदु

दशक: लगभग 20 साल बाद नीतीश कुमार बतौर सांसद संसद भवन पहुंचे।

गठबंधन: एनडीए (NDA) के भीतर नीतीश कुमार की इस भूमिका को 2029 के लोकसभा चुनाव और बिहार के आगामी राजनीतिक समीकरणों के लिए मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है।