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Up kiran,Digital Desk : गिग वर्कर्स यूनियन द्वारा 31 दिसंबर को हड़ताल बुलाए जाने के बाद अल्ट्रा-फास्ट डिलीवरी और राइडर्स की सुरक्षा का मुद्दा फिर से सुर्खियों में आया। हालांकि नए साल के मौके पर जोमैटो और ब्लिंकइट की सेवाएं सुचारू रूप से चलती रहीं, लेकिन सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई कि क्या 10 मिनट की डिलीवरी का वादा राइडर्स की जान जोखिम में डालता है।

जोमैटो के CEO दीपेंद्र गोयल का बयान

जोमैटो के सीईओ दीपेंद्र गोयल ने इस विवाद पर सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म X पर स्पष्टीकरण दिया। उन्होंने कहा कि 10 मिनट की डिलीवरी मॉडल राइडर्स पर दबाव डालकर नहीं, बल्कि मजबूत इन्फ्रास्ट्रक्चर के कारण संभव है।

गोयल ने लिखा कि राइडर्स के ऐप में कोई टाइमर नहीं होता, और उन्हें यह पता नहीं होता कि ग्राहक को डिलीवरी का समय क्या बताया गया है। राइडर्स को तेज गाड़ी चलाने का दबाव नहीं दिया जाता।

उन्होंने डिलीवरी प्रक्रिया की गणना भी साझा की: "ब्लिंकइट पर ऑर्डर देने के बाद सामान 2.5 मिनट में पैक हो जाता है, और डिलीवरी करने वाला लगभग 8 मिनट में औसतन 2 किलोमीटर दूरी तय करता है। इसका मतलब उनकी औसत गति सिर्फ 15 किमी प्रति घंटा है।"

सुरक्षा और बीमा

सुरक्षा के मुद्दे पर गोयल ने बताया कि सभी डिलीवरी पार्टनर्स का मेडिकल और लाइफ इंश्योरेंस होता है। साथ ही, डिलीवरी में देरी होने पर राइडर्स पर कोई जुर्माना नहीं लगाया जाता।

गिग वर्क को करियर के रूप में देखे जाने पर उन्होंने स्पष्ट किया कि यह एक 'अकुशल काम' है और इसे स्थायी नौकरी की तरह नहीं समझना चाहिए। आंकड़ों के अनुसार, सालाना 65% राइडर्स यह काम छोड़ देते हैं, जिससे पता चलता है कि यह नौकरी अधिकतर अस्थायी तौर पर की जाती है।

शोषण और सोशल मीडिया विवाद

गोयल ने माना कि बाहर से यह व्यवस्था शोषणकारी लग सकती है, लेकिन वास्तविकता अलग है। उन्होंने ग्राहकों से अपील की कि वे राइडर्स से खुद बातचीत करके समझें कि वे यह काम क्यों चुनते हैं।

उन्होंने कहा, "कोई भी सिस्टम परफेक्ट नहीं होता, हम सुधार के लिए तैयार हैं। लेकिन सोशल मीडिया पर भ्रामक बातें फैलाना सही नहीं।"

बता दें कि गिग वर्कर्स ने बेहतर वेतन और सुरक्षा की मांग को लेकर हड़ताल की थी, जिसके बाद से ही कंपनियों की जवाबदेही पर बहस जारी है।