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Up Kiran, Digital Desk: जम्मू-कश्मीर के पहाड़ी इलाकों में लगातार हो रही भारी बारिश ने कहर बरपाया है। शुक्रवार रात रियासी जिले के माहौर इलाके के बद्दर गाँव में बादल फटने से हुए भीषण भूस्खलन में एक ही परिवार के सात लोगों की दर्दनाक मौत हो गई। वहीं, रामबन ज़िले के राजगढ़ इलाके में भी एक और बादल फटा, जिसमें तीन लोगों की जान चली गई और एक व्यक्ति अब भी लापता है।

नींद में था परिवार, मलबे में दब गई ज़िंदगी

यह हादसा शुक्रवार देर रात उस वक्त हुआ जब बद्दर गाँव में जोरदार बारिश के बीच बादल फटा और नजीर अहमद का कच्चा मकान पहाड़ी से गिरे मलबे की चपेट में आ गया। घर में मौजूद सभी सात सदस्य सो रहे थे और उन्हें संभलने तक का मौका नहीं मिला।

मृतकों की पहचान:

नजीर अहमद

वजीरा बेगम

बिलाल अहमद

मोहम्मद मुस्तफा

मोहम्मद आदिल

मोहम्मद मुबारक

मोहम्मद वसीम

स्थानीय विधायक मोहम्मद खुर्शीद ने बताया, "घटना के तुरंत बाद ग्रामीणों ने खुद ही बचाव अभियान शुरू किया और मलबे में दबे शवों को बाहर निकाला। प्रशासन को सुबह सूचना दी गई।"

रामबन में आधी रात को तबाही

दूसरी ओर, शनिवार की रात करीब 12:30 बजे रामबन ज़िले के राजगढ़ इलाके में एक और बादल फटा। इस हादसे में अब तक तीन लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जिनमें दो महिलाएं शामिल हैं। एक अन्य व्यक्ति अब भी लापता है।

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जानकारी दी, "राजगढ़ इलाके में बादल फटने से चार लोगों की मौत हुई है। एक व्यक्ति की तलाश जारी है। घायलों की कोई सूचना नहीं है। हरसंभव सहायता दी जा रही है।"

उपमुख्यमंत्री की केंद्र से बड़ी राहत पैकेज की मांग

इस आपदा की भयावहता को देखते हुए जम्मू-कश्मीर के उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने केंद्र सरकार से ₹80,000 करोड़ के राहत पैकेज की मांग की है। उन्होंने कहा, "इस बार जम्मू क्षेत्र में 2014 की कश्मीर बाढ़ से भी ज़्यादा तबाही हुई है। हज़ारों लोग प्रभावित हैं, मकान ढह गए हैं, फसलें तबाह हो गई हैं।"

प्रशासन अलर्ट, लेकिन मुश्किलें कम नहीं

स्थानीय प्रशासन और एनडीआरएफ की टीमें घटनास्थलों पर तैनात हैं, लेकिन खराब मौसम और पहाड़ी इलाकों की कठिन परिस्थितियाँ राहत कार्यों में बड़ी बाधा बन रही हैं। लोगों से पहाड़ी इलाकों में न जाने और सतर्क रहने की अपील की गई है।

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