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Up kiran,Digital Desk : बांग्लादेश में 12 फरवरी को होने वाले चुनाव से पहले अपदस्थ नेता शेख हसीना ने अपने देश में चुनाव प्रक्रिया की कड़ी आलोचना की है। भारत में निर्वासन में रह रही हसीना का आरोप है कि नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार जानबूझकर उनकी पार्टी, अवामी लीग को चुनाव से बाहर कर रही है। उनके ये बयान अगले महीने होने वाले मतदान से पहले राजनीतिक तनाव बढ़ा सकते हैं।

चुनाव से अवामी लीग को दूर रखने का आरोप

शेख हसीना ने एसोसिएटेड प्रेस को ईमेल में कहा कि उनके लाखों समर्थकों को मताधिकार से वंचित किया जा रहा है। उन्होंने लिखा, "जब आबादी के एक महत्वपूर्ण हिस्से को राजनीतिक भागीदारी से वंचित किया जाता है, तो असंतोष गहराता है, संस्थानों की वैधता कम होती है और भविष्य में अस्थिरता पैदा हो सकती है।" हसीना का कहना है कि बहिष्कार पर आधारित सरकार देश को एकजुट नहीं कर सकती।

मतदान और राजनीतिक परिदृश्य

इस चुनाव में 127 मिलियन से अधिक लोग मतदान करने के पात्र हैं। यह दशकों में बांग्लादेश का सबसे महत्वपूर्ण चुनाव माना जा रहा है, खासकर जन विद्रोह के बाद हसीना के सत्ता से हटाए जाने के संदर्भ में। यूनुस सरकार मतदाता व्यापक राजनीतिक सुधारों पर प्रस्तावित संवैधानिक जनमत संग्रह की प्रक्रिया की देखरेख कर रही है। चुनाव प्रचार पिछले सप्ताह ढाका और अन्य क्षेत्रों में रैलियों के साथ शुरू हुआ।

निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव का वादा

हसीना के भारत भाग जाने के बाद 5 अगस्त, 2024 को यूनुस बांग्लादेश लौट आए और सत्ता संभाली। उन्होंने स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव का वादा किया है, लेकिन आलोचक सवाल उठा रहे हैं कि क्या यह प्रक्रिया वास्तव में लोकतांत्रिक और समावेशी होगी। चुनाव आयोग ने कहा कि लगभग 500 विदेशी पर्यवेक्षक, यूरोपीय संघ और राष्ट्रमंडल सहित, मतदान की निगरानी करेंगे।

राजनीतिक और सुरक्षा चुनौतियां

हसीना की सत्ता से बेदखली के बाद बांग्लादेश को कई राजनीतिक और सुरक्षा संबंधी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। मानवाधिकार और अल्पसंख्यक समूहों ने सरकार पर नागरिक और राजनीतिक अधिकारों की रक्षा में विफल रहने का आरोप लगाया। उनके पूर्व सदस्य मनमानी गिरफ्तारी और हिरासत में मौत का आरोप भी लगा चुके हैं। आलोचकों ने बढ़ते इस्लामी समूहों के प्रभाव और अल्पसंख्यकों, विशेष रूप से हिंदुओं पर हमलों को लेकर चिंता व्यक्त की है।

बांग्लादेश राष्ट्रवादी पार्टी की स्थिति

60 वर्षीय तारिक रहमान के नेतृत्व वाली बांग्लादेश राष्ट्रवादी पार्टी (बीएनपी) चुनाव में अग्रणी दावेदार के रूप में उभर रही है। पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के पुत्र रहमान ने देश की स्थिरता और लोकतांत्रिक सुधार का वादा किया है। उनका मुख्य प्रतिद्वंद्वी 11 सहयोगी दलों का गठबंधन है, जिसका नेतृत्व इस्लामी पार्टी जमात-ए-इस्लामी कर रही है। हसीना के शासनकाल में जमात-ए-इस्लामी पर दबाव था और इसे चुनाव में भाग लेने से रोका गया था।

शेख हसीना का संदेश: घाव भरना जरूरी

हसीना ने कहा कि देश को अपने राजनीतिक घाव भरने होंगे और एक वैध सरकार की जरूरत है जो लोगों की वास्तविक सहमति से शासन करे। उन्होंने चेताया कि लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं का बहिष्कार देश के सुधार की राह में सबसे बड़ी बाधा है। हसीना ने जोर देकर कहा, “देश के घावों को भरना ही सबसे सही रास्ता है।”

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