Up kiran,Digital Desk : वॉशिंगटन से बड़ी कूटनीतिक हलचल सामने आई है। भारत-अमेरिका संभावित ट्रेड डील पर आधिकारिक संयुक्त बयान से पहले अमेरिकी विदेश मंत्री Marco Rubio ने दावा किया है कि भारत ने रूस से तेल खरीद बंद करने का आश्वासन दिया है। हालांकि, नई दिल्ली की ओर से अब तक इस संबंध में कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, जिससे वैश्विक ऊर्जा और कूटनीतिक गलियारों में अटकलें तेज हो गई हैं।
ट्रेड डील के बीच आया बड़ा बयान
भारत और अमेरिका के बीच टैरिफ, निर्यात और ऊर्जा सहयोग को लेकर बातचीत जारी है। इसी दौरान रुबियो का यह बयान सामने आया, जिसने बहस को नया मोड़ दे दिया। उनका कहना है कि भारत रूस से तेल आयात कम करने की दिशा में कदम बढ़ाने को तैयार है। यह बयान ऐसे समय आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump पहले भी सार्वजनिक मंचों से दावा कर चुके हैं कि भारत अमेरिकी ऊर्जा आयात बढ़ाने पर सहमत हुआ है।
रूस ने किया खंडन
अमेरिकी दावे पर रूस की प्रतिक्रिया भी सामने आ चुकी है। रूसी विदेश मंत्री Sergey Lavrov ने कहा कि उन्हें भारत की ओर से ऐसा कोई आधिकारिक संकेत नहीं मिला है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मुद्दे पर केवल अमेरिकी अधिकारियों के बयान सामने आए हैं, जिससे स्थिति और उलझी हुई दिख रही है।
भारत ने दोहराई रणनीतिक स्वतंत्रता
इस पूरे घटनाक्रम के बीच भारत के विदेश मंत्री S. Jaishankar ने हाल ही में म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में कहा कि भारत अपने राष्ट्रीय हितों के आधार पर निर्णय लेता है। उनके मुताबिक, ऊर्जा खरीद का फैसला बाजार परिस्थितियों, कीमत और आपूर्ति सुरक्षा को ध्यान में रखकर किया जाता है। भारत किसी भी बाहरी दबाव में नीति नहीं बदलता।
ऊर्जा समीकरण और आंकड़े
यूक्रेन युद्ध के बाद रूस ने रियायती दरों पर कच्चा तेल उपलब्ध कराया, जिसके चलते भारत ने बड़े पैमाने पर आयात बढ़ाया। वर्तमान में भारत के कुल कच्चे तेल आयात का लगभग 35 प्रतिशत हिस्सा रूस से आता है, जबकि अमेरिका की हिस्सेदारी करीब 10 प्रतिशत बताई जाती है। ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की प्राथमिकता ऊर्जा सुरक्षा और किफायती आपूर्ति सुनिश्चित करना है।
क्या बदलेगा भारत का रुख?
ट्रेड डील की औपचारिक घोषणा से पहले आए इस दावे ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या भारत रूस पर निर्भरता कम करेगा? क्या अमेरिका के साथ ऊर्जा सहयोग नई दिशा लेगा? या फिर यह बयान महज कूटनीतिक दबाव की रणनीति है? आधिकारिक संयुक्त वक्तव्य के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।


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