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Up Kiran, Digital Desk: उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची विशेष पुनरीक्षण का दबाव अब जान ले रहा है। भोजपुर क्षेत्र के बहेड़ी ब्राह्मणान गांव में रहने वाले सहायक शिक्षक सर्वेश सिंह ने शनिवार रात अपने घर में फांसी लगा ली। सुबह परिजनों ने शव फंदे से लटकता देखा तो घर में चीख-पुकार मच गई।

सर्वेश पिछले आठ साल से जाहिदपुर कंपोजिट स्कूल में पढ़ाते थे। इस बार उन्हें पहली बार बीएलओ बनाया गया। घरवालों ने पुलिस को खबर की। जांच में उनकी जेब से तीन पन्नों का सुसाइड नोट मिला जो पढ़कर किसी की भी रूह कांप जाए।

नोट में सर्वेश ने लिखा है कि टार्गेट बहुत ज्यादा है और समय बहुत कम। दिन रात मेहनत कर रहा हूं फिर भी काम पूरा नहीं हो पा रहा। रात में दो-तीन घंटे भी नींद नहीं आती। मानसिक तनाव इतना बढ़ गया है कि अब जीने की इच्छा नहीं बची। अगर एक हफ्ते का भी समय और मिल जाता तो शायद मैं टार्गेट पूरा कर लेता।

सबसे दर्दनाक हिस्सा वो है जिसमें उन्होंने अपनी चार छोटी-छोटी बेटियों का जिक्र किया। लिखा – मेरी बेटियां बहुत मासूम हैं। दो तो लंबे समय से बीमार चल रही हैं। मेरे जाने के बाद उनका ख्याल रखना। सारी पेंशन और पैसा मेरी पत्नी को मिले ताकि बच्चों की परवरिश अच्छे से हो सके। मुझे पता है मेरे बिना उनका जीवन मुश्किल हो जाएगा लेकिन मैं मजबूर हूं।

परिवार ने बहुत हौसला दिया मगर काम का बोझ सहन नहीं कर पाया। आखिरी लाइनों में लिखा – मेरी मौत की जिम्मेदारी सिर्फ मेरी है। किसी अधिकारी ने मुझे परेशान नहीं किया। मेरे परिवार को कोई तंग न करे। कहने को बहुत कुछ है मगर अब वक्त नहीं बचा।

सबसे हैरान करने वाली बात ये कि सर्वेश की मौत के कुछ घंटे बाद ही चुनाव आयोग ने ऐलान कर दिया कि एसवीआर की डेडलाइन एक हफ्ता बढ़ा दी गई है। पहले 4 दिसंबर थी अब 11 दिसंबर तक का समय मिल गया। यूपी में अभी सिर्फ 61 फीसदी फॉर्म ही जमा हो पाए थे।

गौरतलब है कि पिछले पांच दिनों में यूपी में यह तीसरा मामला है। इसके पहले फतेहपुर में लेखपाल रामलाल कोरी ने शादी से एक दिन पहले जान दे दी थी। फिर गोंडा में सहायक शिक्षक विपिन यादव ने जहर खाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली।