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Up Kiran, Digital Desk: उत्तराखंड में इस साल सर्दी का मौसम कुछ असामान्य रहा है, खासकर ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी का न होना एक चिंता का विषय बन चुका है। अक्टूबर से जनवरी तक इस क्षेत्र में हिमपात का स्तर लगभग शून्य रहा, और खासतौर से रुद्रप्रयाग जिले के तुंगनाथ क्षेत्र में जनवरी में बर्फ नहीं पड़ी, जो कि 1985 के बाद पहली बार हुआ है। इसके साथ ही बद्रीनाथ और केदारनाथ जैसे प्रमुख तीर्थ स्थल, जो आम तौर पर जनवरी में बर्फ की चादर से ढके रहते हैं, इस बार बर्फ से खाली नजर आए हैं।

गूंजी और हिल स्टेशन भी रहे बर्फ से वंचित

हिमालय की ऊंची चोटियों से लेकर प्रसिद्ध हिल स्टेशनों जैसे नैनीताल, मसूरी, और मुक्तेश्वर में भी इस सर्दी में बर्फबारी नहीं हुई। यह स्थिति तब और चौंकाने वाली हो जाती है जब हम गूंजी जैसे 15,000 फीट ऊंचे क्षेत्र की बात करें, जहां इस बार बर्फबारी का नामोनिशान नहीं था। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, उत्तराखंड में बर्फबारी न होने के पीछे मुख्य कारण जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग है, जो पूरे क्षेत्र के पर्यावरणीय संतुलन को प्रभावित कर रहा है। इसका असर और भी गहरा हो सकता है यदि यह रुझान लगातार जारी रहता है।

ग्लोबल वार्मिंग और जंगलों में आग का खतरा

बर्फबारी के कम होने का एक और गंभीर परिणाम यह है कि पहाड़ी इलाकों में जंगलों में आग की घटनाएं बढ़ने लगी हैं, जो आम तौर पर गर्मियों में देखी जाती थीं। मौसम में हो रहे अनियंत्रित बदलावों से न केवल हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र पर दबाव बढ़ रहा है, बल्कि जल स्रोतों, कृषि और पर्यटन उद्योग पर भी इसके नकारात्मक प्रभाव पड़ने की आशंका जताई जा रही है।