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Up kiran,Digital Desk : सुरों के सरताज सोनू निगम (Sonu Nigam) आज भले ही दुनिया भर में अपने कॉन्सर्ट से समां बांधते हों, लेकिन एक दौर ऐसा भी था जब मौत उनके बेहद करीब से गुजर गई थी। साल 2004 में पाकिस्तान के कराची में हुए बम ब्लास्ट की वो सिहरन पैदा करने वाली यादें एक बार फिर ताजा हो गई हैं। सोनू निगम ने हाल ही में सोशल मीडिया पर एक डॉक्यूमेंट्री की रील साझा की है, जिसमें उस आत्मघाती हमले की पूरी कहानी बयां की गई है, जिससे वह और उनका परिवार बाल-बाल बचा था।

10 अप्रैल 2004: जब मौत के मुंह से लौटे सोनू

कराची में आयोजित इस टूर के दौरान 10 अप्रैल को वह काला दिन था, जब सोनू निगम के वेन्यू के पास जबरदस्त धमाका हुआ था। रील में बताया गया है कि सोनू की बस जिस जगह से गुजरी, उसके ठीक पीछे जोरदार ब्लास्ट हुआ। धमाका इतना शक्तिशाली था कि बस के परखच्चे उड़ सकते थे, लेकिन किस्मत ने उनका साथ दिया। उस वक्त के ऑर्गनाइजर फुरकान (जिनका मार्च 2025 में निधन हो गया) ने बताया कि कैसे पाकिस्तानी रेंजर्स और सुरक्षा घेरे ने तुरंत सोनू को अपनी सुरक्षा में ले लिया था।

धमाके के बाद भी नहीं रुका संगीत का सफर

हैरानी की बात यह है कि इतने बड़े हादसे और अफरा-तफरी के बावजूद सोनू निगम ने अपना शो कैंसिल नहीं किया। भारी सुरक्षा के बीच उन्हें मरीना होटल ले जाया गया, जहाँ होटल स्टाफ ने उनका मनोबल बढ़ाया। इसके बाद वह बैकस्टेज पहुंचे और जब मंच पर आए, तो उनके शब्द सीधे लोगों के दिल में उतर गए। सोनू ने कहा, "मुझ पर अटैक यहां हुआ, लेकिन बचाया भी पाकिस्तान ने ही।" उन्होंने भारत-पाकिस्तान के रिश्तों पर भावुक होते हुए कहा था कि दोनों मुल्कों के लोग प्यार के भूखे हैं और दुआ करें कि यह प्यार हमेशा बढ़ता रहे।

हनुमान चालीसा को मानते हैं 'चमत्कार'

सोनू निगम ने इस घटना के पीछे अपनी अटूट श्रद्धा का भी जिक्र किया है। वह बताते हैं कि वह हर शो से पहले 'हनुमान चालीसा' का पाठ जरूर करते हैं और कराची के उस शो से पहले भी उन्होंने ऐसा ही किया था। सोनू के अनुसार, उनकी बस जिस बम के ऊपर से गुजरी थी, उसका रिमोट समय पर नहीं दब पाया, जिसे वह बजरंगबली की असीम कृपा मानते हैं। इस घटना के बाद उनकी आध्यात्मिक आस्था और अधिक गहरी हो गई।

डॉक्यूमेंट्री के जरिए ताजा हुईं यादें

इंस्टाग्राम पर अर्सलान खान नामक शख्स द्वारा साझा की गई इस डॉक्यूमेंट्री में दिखाया गया है कि कैसे उस रात सोनू ने 'क्या बेबसी है ये क्या हैं मजबूरियां' जैसे सुपरहिट गाने गाकर कराची की जनता का दिल जीत लिया था। यह रील उन पलों को दिखाती है जब संगीत ने नफरत और डर पर जीत हासिल की थी।