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Up Kiran, Digital Desk: बिहार में विधानसभा चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आ रहे हैं, राज्य की गिरती कानून व्यवस्था को लेकर सियासी हलचल तेज होती जा रही है। मगर इस बार सिर्फ विपक्ष नहीं, बल्कि सत्ताधारी गठबंधन के नेता भी राज्य सरकार पर सवाल उठाते दिख रहे हैं। नतीजा यह है कि आम जनता के मन में सुरक्षा को लेकर बेचैनी और असमंजस और गहरा हो गया है।

जनता के मुद्दे बन रहे राजनीतिक हथियार

एनडीए के सहयोगी दल लोक जनशक्ति (रामविलास) पार्टी के नेता और केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान ने हाल ही में बिहार में अपराधों की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताई। उनका बयान सामने आते ही नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने इसे एक अवसर की तरह इस्तेमाल करते हुए नीतीश सरकार और खुद चिराग पर तीखे सवाल दाग दिए। तेजस्वी का कहना है कि जब सरकार के भीतर के लोग ही अपराध की स्थिति पर असंतुष्ट हैं, तो आम जनता की स्थिति का अंदाजा लगाना मुश्किल नहीं है।

तेजस्वी का पलटवार – चिराग सत्ता में होकर भी बेबस क्यों?

तेजस्वी यादव ने चिराग पासवान के रुख को विरोधाभासी बताते हुए कहा कि एक ओर वह खुद सरकार का हिस्सा हैं, केंद्रीय कैबिनेट में मंत्री हैं, दूसरी ओर अपराध पर केवल बयानबाज़ी कर रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि जब इतनी ताकत होने के बावजूद चिराग कुछ नहीं कर पा रहे, तो इससे यह साफ है कि सत्ता में होते हुए भी वे लाचार हैं और यही बात बिहार की आम जनता को सबसे ज्यादा परेशान कर रही है।

दिल दहलाने वाली घटनाएं और बढ़ती असुरक्षा

तेजस्वी ने गया में हाल ही में घटी एक अत्यंत गंभीर घटना का हवाला दिया, जहां होमगार्ड की दौड़ के दौरान एक युवती बेहोश हो गई थी और उसे अस्पताल ले जाते समय एम्बुलेंस में उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया गया। इस घटना ने राज्य भर में आक्रोश फैलाया है और यह सवाल उठ रहा है कि जब एक लड़की एम्बुलेंस तक में महफूज़ नहीं है, तो आम लोगों की सुरक्षा की क्या गारंटी है?

सियासत के बीच डर और गुस्से में जनता

राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा है, लेकिन सबसे ज्यादा प्रभावित आम नागरिक हो रहे हैं। महिलाओं की सुरक्षा, भ्रष्टाचार और गिरती प्रशासनिक पकड़ जैसे मुद्दे चुनावी भाषणों का हिस्सा तो बनते हैं, लेकिन जमीनी बदलाव नजर नहीं आता। चिराग पासवान जैसे नेता जब खुद ही व्यवस्था पर सवाल उठाते हैं, तो जनता के भरोसे पर और गहरी चोट लगती है।

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