img

UP Kiran,Digital Desk: नीतीश शासन ने सरकारी स्कूलों में कार्यरत फर्जी शिक्षकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का निर्णय लिया है। एक दशक से चल रही जांच में यह खुलासा हुआ है कि करीब तीन हजार शिक्षक फर्जी प्रमाणपत्रों के आधार पर नौकरी पा चुके थे। राज्य सरकार ने इन शिक्षकों से न केवल वेतन की वसूली करने का ऐलान किया है, बल्कि उस पर ब्याज भी लिया जाएगा। यह कदम न केवल सरकारी खजाने की हानि को रोकने के लिए, बल्कि बिहार के शिक्षा क्षेत्र में विश्वास बहाल करने के लिए भी अहम माना जा रहा है।

फर्जी प्रमाणपत्रों का खेल
जांच से यह सामने आया है कि इन फर्जी शिक्षकों ने कई तरह के धोखाधड़ी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया था। इनमें फर्जी बीएड, बीए, बीएससी की डिग्री के साथ-साथ झूठे निवास प्रमाणपत्र, जाति प्रमाणपत्र और आधार कार्ड भी शामिल थे। इन दस्तावेजों के सहारे इन शिक्षकों ने सरकारी स्कूलों में नौकरी हासिल की और वर्षों तक वेतन भी प्राप्त किया, जिससे राज्य सरकार को लाखों रुपये का नुकसान हुआ।

1400 करोड़ रुपये की वसूली का मुद्दा
शिक्षा विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, इन फर्जी शिक्षकों को पिछले कुछ वर्षों में कुल 1400 करोड़ रुपये से अधिक वेतन दिया गया है। अब सरकार इस राशि की वसूली की तैयारी में है, और इसे ब्याज सहित चुकता करने का आदेश दिया गया है। प्रारंभिक चरण में लगभग तीन हजार ऐसे शिक्षकों के खिलाफ कार्रवाई शुरू हो चुकी है।

12,000 और शिक्षक संदेह के घेरे में
यह मामला यहीं नहीं रुकता। शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, अभी लगभग 12 हजार शिक्षक और हैं, जिनके दस्तावेजों की जांच की जा रही है। इन शिक्षकों के प्रमाणपत्रों में गड़बड़ी पाए जाने पर उनके खिलाफ भी कठोर कार्रवाई की जाएगी। जांच के दायरे में बिहार के अलावा उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, झारखंड, दिल्ली और हरियाणा से जुड़े प्रमाणपत्र भी शामिल हैं।