UP Kiran,Digital Desk: बिहार सरकार ने राज्य के विभिन्न हिस्सों में जमीनों के गलत उपयोग पर सख्त रुख अपनाया है। अब अगर कोई जमीन लीज की शर्तों का उल्लंघन कर व्यावसायिक या अन्य उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल की जा रही है, तो उसकी बंदोबस्ती रद्द की जा सकती है। यह कदम जमीनों के सही उपयोग और शर्तों के पालन को सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है।
12 जिलों में शुरू होगी व्यापक जांच
राजस्व और भूमि सुधार विभाग ने राज्य के 12 जिलों के अधिकारियों को आदेश दिए हैं कि वे उन जमीनों की पहचान करें, जिनका उपयोग लीज शर्तों के खिलाफ हो रहा है। इस प्रक्रिया में पटना, मुजफ्फरपुर, भागलपुर, रोहतास, बक्सर, भोजपुर, मुंगेर, पूर्णिया, समस्तीपुर, सीतामढ़ी, पूर्वी चंपारण और पश्चिम चंपारण शामिल हैं। इन जिलों को 15 फरवरी तक अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी, ताकि आगे की कार्रवाई की जा सके।
अधिकारियों को सख्त दिशा-निर्देश
उपमुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक के बाद यह कदम और कड़ा किया गया है। अधिकारियों को आदेश दिया गया है कि वे अवैध रूप से इस्तेमाल हो रही जमीनों की पहचान कर जल्द से जल्द उनके खिलाफ कार्रवाई की रिपोर्ट भेजें। सरकार की नज़र अब उन स्थानों पर है, जहां लीज की शर्तों का उल्लंघन हो रहा है और जहां सरकारी जमीन का गलत उपयोग किया जा रहा है।
मुजफ्फरपुर पर विशेष ध्यान
मुजफ्फरपुर जिले में कुछ विशेष स्थानों पर इस मामले की गंभीरता बढ़ गई है। उदाहरण के तौर पर, एमएसकेबी कॉलेज और स्कूल को जिस जमीन पर लीज दी गई थी, वह शिक्षा के उद्देश्य के लिए आवंटित थी। लेकिन, वर्तमान में वहां व्यावसायिक गतिविधियां चल रही हैं, जैसे दुकानों का संचालन। यह गंभीर उल्लंघन है, और सरकार इस पर विशेष ध्यान दे रही है।
क्यों जरूरी है यह कदम?
सरकार का उद्देश्य स्पष्ट है। वह चाहती है कि लीज पर दी गई जमीनों का उपयोग केवल उन्हीं उद्देश्यों के लिए हो, जिनके लिए वे आवंटित की गई थीं। यह कदम समाज के विकास के लिए आवंटित जमीनों की सुरक्षा को सुनिश्चित करेगा, खासकर शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य सार्वजनिक हितों के लिए। अगर यह कदम सफल होता है, तो यह सुनिश्चित करेगा कि सरकारी जमीनों का व्यावसायिक उपयोग से बचाव किया जा सके, और उनका सही दिशा में इस्तेमाल हो।




