Up kiran,Digital Desk : सुप्रीम कोर्ट में आवारा कुत्तों के मुद्दे पर लगातार तीसरे दिन सुनवाई हुई। अदालत ने शैक्षणिक संस्थानों और कार्यालय परिसरों में भटकते कुत्तों की समस्या पर ध्यान केंद्रित किया। इस सुनवाई में तीन न्यायाधीशों की पीठ—न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एन.वी. अंजारिया—ने लगभग डेढ़ घंटे तक मामले की जांच की और अगली सुनवाई 13 जनवरी के लिए स्थगित कर दी।
इस दौरान एनीमल राइट्स एक्टिविस्ट और सीनियर एडवोकेट महालक्ष्मी पावनी ने अवैध प्रजनन और महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े मुद्दे उठाए। उन्होंने कहा कि कुछ लोग कुत्ते रखने वाली महिलाओं के बारे में अपमानजनक बातें करते हैं और उन्हें गलत आरोपों का सामना करना पड़ता है।
वहीं याचिकाकर्ता के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने अदालत से मामले में हस्तक्षेप न करने की अपील की। उनका कहना था कि कानून और नियम पहले से मौजूद हैं, इसलिए अदालत को इसमें दखल देने की आवश्यकता नहीं है। सिंघवी ने यह भी कहा कि इस तरह के मामलों में पशु, पर्यावरण और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की राय लेना ज्यादा उचित होगा, क्योंकि वे इस विषय में वास्तविक विशेषज्ञ होते हैं।
सुप्रीम कोर्ट की यह सुनवाई इसलिए अहम है क्योंकि यह केवल कुत्तों के अधिकारों का मामला नहीं है, बल्कि जनता की सुरक्षा, नियमों का पालन और सामाजिक जिम्मेदारी से जुड़ा है। अदालत इस मामले में संतुलित निर्णय लेने की कोशिश कर रही है ताकि कुत्तों के अधिकार और इंसानों की सुरक्षा दोनों सुनिश्चित हो सकें।




