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Up Kiran, Digital Desk: आंध्र प्रदेश के तिरुपति स्थित राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय (NSU) के हेरिटेज कॉरिडोर में नवनिर्मित श्री स्वामीनारायण परंपरा अक्षर पुरुषोत्तम मंदिर का भव्य उद्घाटन ओडिशा के राज्यपाल डॉ. कंभमपति हरिबाबू और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने संयुक्त रूप से किया। इस उद्घाटन समारोह ने संस्कृत, सनातन धर्म और भारत की प्राचीन ज्ञान परंपराओं के महत्व को एक बार फिर रेखांकित किया, साथ ही देश को 'विश्व गुरु' के रूप में पुनः स्थापित करने के प्रयासों पर भी प्रकाश डाला।

सनातन धर्म और संस्कृत: मानव जीवन का आधार

इस अवसर पर बोलते हुए, मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सनातन धर्म की गहरी महानता पर प्रकाश डाला, यह बताते हुए कि मानव जीवन मूलतः धर्म में ही निहित है। उन्होंने संस्कृत को धर्म की आधारभूत भाषा और भारत की विशाल व प्राचीन ज्ञान प्रणालियों का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बताया। धामी ने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत सरकार भारत को एक 'विश्व गुरु', यानी एक वैश्विक आध्यात्मिक और बौद्धिक नेता के रूप में पुनः स्थापित करने के लिए महत्वपूर्ण प्रयास कर रही है। यह दर्शन भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और ज्ञान परंपराओं को विश्व पटल पर लाने के संकल्प को दर्शाता है।

संस्कृत: एक जीवंत विरासत और वैज्ञानिक ज्ञान का भंडार

राज्यपाल हरिबाबू ने मुख्यमंत्री के विचारों का समर्थन करते हुए संस्कृत को एक जीवंत विरासत बताया जो मानवता का मार्गदर्शन करती रहती है। उन्होंने संस्कृत ग्रंथों में निहित वैज्ञानिक ज्ञान को रेखांकित किया, जैसे राम सेतु, ब्रह्मास्त्र और पाशुपतास्त्र के निर्माण का उल्लेख करते हुए इसकी उन्नत बौद्धिक और वैज्ञानिक गहराई को प्रमाणित किया। यह दर्शाता है कि प्राचीन भारत में विज्ञान और प्रौद्योगिकी का स्तर कितना उच्च था।

राज्यपाल ने आगे बताया कि पाणिनीय व्याकरण आधुनिक कम्प्यूटेशनल भाषा विज्ञान और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के लिए अत्यधिक प्रासंगिक है। यह बिंदु संस्कृत की कालातीत प्रासंगिकता और आधुनिक वैज्ञानिक प्रगति के साथ उसके गहरे संबंध को स्थापित करता है। उन्होंने वास्तुकला और वास्तु शास्त्र से संबंधित संस्कृत ग्रंथों में निहित ज्ञान के धन का भी उल्लेख किया, और सभी से इस भाषा का गहराई से अध्ययन करने और इसके ज्ञान को आत्मसात करने का आग्रह किया।

संस्कृत विश्वविद्यालय की पहल और आध्यात्मिक मार्गदर्शन

राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. जी.एस.आर. कृष्ण मूर्ति ने संस्कृत को बढ़ावा देने के लिए विश्वविद्यालय की विभिन्न पहलों का विस्तृत विवरण दिया और चल रही शैक्षणिक व सांस्कृतिक गतिविधियों पर अद्यतन जानकारी साझा की। नई दिल्ली के अक्षर पुरुषोत्तम धाम के अध्यक्ष महामहोपाध्याय साधु भद्रेशदास स्वामी ने भी सभा को संबोधित करते हुए आध्यात्मिक अंतर्दृष्टि प्रदान की और इस अवसर पर सभी को आशीर्वाद दिया।

इस महत्वपूर्ण अवसर पर अन्य गणमान्य व्यक्ति भी उपस्थित थे, जिनमें रजिस्ट्रार के. वेंकट नारायण राव, एस.वी. वैदिक विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. रानी सदाशिव मूर्ति, प्रो. के. गणपति भट्ट, सौरभ पांडे, डॉ. ज्ञानरंजन पांडा, विनय के. रुहेला, प्रो. वी. रमेश बाबू और डॉ. कनापाला कुमार शामिल थे। इनके साथ ही विश्वविद्यालय के डीन, संकाय सदस्य और छात्र भी इस आध्यात्मिक और शैक्षिक कार्यक्रम का हिस्सा बने

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