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Up kiran,Digital Desk : कुछ महीने पहले तक क्रिकेट की दुनिया में एक ही बहस छिड़ी हुई थी- क्या रोहित शर्मा और विराट कोहली का दौर अब वनडे में खत्म हो गया है? दोनों टेस्ट और T20 से संन्यास ले चुके हैं, घरेलू क्रिकेट खेलते नहीं, और 2027 वर्ल्ड कप के लिए कोई पक्का प्लान भी नहीं। बातें इतनी बढ़ गईं कि BCCI को इन दोनों के भविष्य पर फैसला करने के लिए मीटिंग बुलानी पड़ी। सवाल एक ही था- क्या अब नई पीढ़ी के लिए इन दो दिग्गजों को अलविदा कह देना चाहिए?

लेकिन पिछले कुछ हफ्तों ने दुनिया को एक बार फिर याद दिलाया है- क्लास हमेशा परमानेंट होती है और अनुभव पर शक करना क्रिकेट की सबसे बड़ी गलती है।

जब ऑस्ट्रेलिया में गरजा 'हिटमैन' का बल्ला

ऑस्ट्रेलिया की उछाल भरी पिचों पर रन बनाना अच्छे-अच्छे बल्लेबाजों के लिए लोहे के चने चबाने जैसा होता है। लेकिन रोहित शर्मा ने अपने शांत और elegante अंदाज़ से दिखाया कि बॉस कौन है। तीन मैचों में 101 की अविश्वसनीय औसत से 202 रन ठोक डाले। नतीजा? 'प्लेयर ऑफ द सीरीज' की ट्रॉफी उनके हाथ में थी। उनके बल्ले से वही पुरानी लय और आत्मविश्वास झलक रहा था, जिसने उन्हें दुनिया का सबसे खतरनाक ओपनर बनाया है।

और फिर 'किंग' कोहली ने की बादशाहत

जैसे ही टीम भारत लौटी, लगा कि शायद माहौल बदलेगा। गेंदबाज बदले, मैदान बदला, लेकिन 'किंग' कोहली का अंदाज़ नहीं बदला। साउथ अफ्रीका के खिलाफ तीन मैचों में उन्होंने 151 की औसत से 302 रन बना डाले और आलोचकों को करारा जवाब दिया। यह सिर्फ रन नहीं थे, यह एक ऐलान था कि सिंहासन पर आज भी उसी का राज है।

इसी के साथ कोहली ने सचिन तेंदुलकर का एक बड़ा रिकॉर्ड भी तोड़ दिया। वह अब 22 बार 'प्लेयर ऑफ द सीरीज' जीतने वाले दुनिया के पहले खिलाड़ी बन गए हैं, सचिन (20) को पीछे छोड़ते हुए।

पर्दे के पीछे की कहानी: कैसे बदली पूरी गेम?

जैसे ही ये कानाफूसी शुरू हुई कि अब इन्हें टीम में जगह बनाने के लिए खुद को साबित करना होगा, कुछ तो बदल गया था। रोहित, जो हमेशा से थोड़े रिलैक्स नज़र आते थे, अचानक कई सालों में अपनी सबसे अच्छी फिटनेस में दिखे। उन्होंने अपना वजन कम किया, फील्ड पर डाइव लगाने लगे और बाउंड्री पर शानदार कैच पकड़ने लगे।

वहीं, कोहली की फिटनेस पर कभी सवाल था ही नहीं, लेकिन उनके खेलने के तरीके में एक नई आक्रामकता दिखी। साउथ अफ्रीका के खिलाफ उन्होंने जिस आसानी से छक्के जड़े और उनका 'नो-लुक' शॉट तो जैसे एक चेतावनी थी कि अभी पिक्चर बाकी है।

शायद सबसे दिलचस्प पल वो था, जब सीरीज़ जीतने के बाद रोहित ने केक खाने से मना कर दिया और मज़ाक में कोहली को कैलोरी लेने दी। यह छोटी सी घटना बताती है कि दोनों दिग्गज 2027 वर्ल्ड कप के लिए कितने भूखे और फोकस्ड हैं।

आंकड़े कभी झूठ नहीं बोलते

  1. रोहित शर्मा - 650 रन

अगला कोई खिलाड़ी इनके आसपास भी नहीं है। दोनों का औसत 50 से ऊपर है और स्ट्राइक रेट 95 के पार। ये आंकड़े चीख-चीखकर कह रहे हैं कि ये दोनों आज भी भारतीय बल्लेबाजी की रीढ़ हैं।

ड्रेसिंग रूम का बदला हुआ माहौल

साउथ अफ्रीका में टेस्ट सीरीज़ बुरी तरह हारने के बाद टीम का मनोबल गिरा हुआ था। तब इन्हीं दोनों सीनियर खिलाड़ियों ने माहौल को संभाला। कोहली की पुरानी आक्रामकता और मैदान पर उनका जोश लौट आया। वहीं, रोहित का मज़ाकिया अंदाज़ और कुलदीप के साथ डीआरएस पर उनकी नोकझोंक वाले वीडियो ने ड्रेसिंग रूम के तनाव को हल्का कर दिया।

तो आगे क्या?

वर्ल्ड कप अभी दो साल दूर है, लेकिन एक बात साफ है- रोहित और कोहली ने सिर्फ अपनी जगह वापस नहीं पाई है, बल्कि उन्होंने यह साबित कर दिया है कि आज भी टीम इंडिया उनके बिना अधूरी है। जैसा कि दिग्गज क्रिकेटर श्रीकांत ने कहा, “शायद ये टीम इन दोनों के बिना वर्ल्ड कप नहीं जीत सकती।”