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UP Kiran,Digital Desk: यूपी के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने 11 फरवरी को विधानसभा में योगी सरकार के दूसरे कार्यकाल का अंतिम पूर्ण बजट पेश किया। इस बार का बजट 9,12,696.35 करोड़ रुपये का है, जो प्रदेश के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा वित्तीय प्रस्ताव है। बजट की खास बात यह रही कि इसमें युवाओं, महिलाओं और किसानों को प्राथमिकता दी गई है।

युवाओं के लिए डिजिटल युग और नई तकनीकों का रास्ता
योगी सरकार ने युवाओं को प्रौद्योगिकी और कौशल से जोड़ने के लिए कई अहम योजनाओं की घोषणा की है। 'स्वामी विवेकानंद युवा सशक्तिकरण योजना' के तहत, सरकार 40 लाख नए टैबलेट और स्मार्टफोन वितरित करेगी, जिसके लिए 2,374 करोड़ रुपये का बजट रखा गया है। इसके साथ ही, प्रदेश में 'उत्तर प्रदेश एआई मिशन' की शुरुआत भी की जाएगी, जिसमें 225 करोड़ रुपये की राशि आवंटित की गई है। इस मिशन का उद्देश्य युवाओं को उभरती हुई तकनीकों जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में प्रशिक्षित करना है। इसके अलावा 'टेक युवा-समर्थ युवा' योजना के तहत प्रदेश के युवाओं को डिजिटल क्षेत्र में विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।

महिलाओं को सशक्त बनाने की योजनाएं
महिलाओं के लिए सरकार ने कई योजनाओं की घोषणा की, जो उनके शिक्षा, सुरक्षा और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देंगी। 'रानी लक्ष्मीबाई योजना' के तहत मेधावी छात्राओं को स्कूटी देने के लिए 400 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। वहीं, मुख्यमंत्री सुमंगला योजना के तहत 26.81 लाख बालिकाओं को लाभ मिल सकेगा। महिलाओं के लिए विशेष रूप से 100 करोड़ रुपये की लागत से 'वूमेन बीपीओ' (महिला बीपीओ) की स्थापना की जाएगी, जिससे ग्रामीण इलाकों की महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकेंगी। इसके अलावा, 'लखपति दीदी' योजना के तहत 16 लाख से ज्यादा महिलाओं को वित्तीय स्वतंत्रता का मार्ग दिखाया जाएगा।

किसानों को राहत: मुफ्त बिजली और गन्ने के दाम में बढ़ोतरी
कृषि क्षेत्र में इस बजट से किसानों को बड़ी राहत मिल सकती है। सरकार ने किसानों के लिए मुफ्त बिजली आपूर्ति को जारी रखने का ऐलान किया है, जिससे नलकूपों से सिंचाई करने वाले किसानों को फायदा होगा। इसके साथ ही, गन्ना किसानों के लिए पेराई सत्र 2025-26 में गन्ने के मूल्य में 30 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी की गई है, जिससे उन्हें अतिरिक्त 3,000 करोड़ रुपये का लाभ मिलेगा। कृषि क्षेत्र में कुल बजट का 9 प्रतिशत हिस्सा आवंटित किया गया है।

स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार और 'राज सुरक्षा योजना' का लाभ
स्वास्थ्य क्षेत्र में भी सरकार ने कई बड़े कदम उठाए हैं। प्रदेश के सभी जिला अस्पतालों में इमरजेंसी और ट्रॉमा सेंटर स्थापित करने की योजना है। इसके अलावा, सड़क दुर्घटनाओं और अन्य आपातकालीन स्थितियों के लिए 'राज सुरक्षा योजना' शुरू की जाएगी, जिसके तहत हाईवे पर 250 आधुनिक एम्बुलेंस तैनात की जाएंगी। असाध्य रोगों के मुफ्त इलाज के लिए 130 करोड़ रुपये और आयुष्मान भारत योजना के तहत 500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

बुनियादी ढांचे और पर्यटन में बड़ा निवेश
प्रदेश में बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 19.5 प्रतिशत हिस्सा पूंजीगत परिव्यय के रूप में रखा गया है। सड़कों और पुलों के निर्माण के लिए 34,468 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है। इसके अलावा, अयोध्या के विकास के लिए 150 करोड़ रुपये और लखनऊ के कुकरैल में 'नाइट सफारी' के निर्माण के लिए 207 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। प्रदेश के ऐतिहासिक स्थलों जैसे सारनाथ और हस्तिनापुर के विकास के लिए भी बजट में विशेष provisions किए गए हैं, जिससे पर्यटन क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा।

श्रमिक कल्याण और औद्योगिक विकास को भी मिलेगी प्राथमिकता
श्रमिकों के लिए शहरों में 'लेबर अड्डों' का निर्माण किया जाएगा, और ई-श्रम पोर्टल पर पंजीकृत श्रमिकों के लिए दुर्घटना बीमा योजना को सुदृढ़ किया जाएगा। एमएसएमई (MSME) क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए 3,822 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके साथ ही, 'एक जनपद एक उत्पाद' योजना के तहत अब 'एक जनपद एक व्यंजन' की योजना भी शुरू की जाएगी, जिससे स्थानीय उत्पादों को बढ़ावा मिलेगा। औद्योगिक विकास को गति देने के लिए 'सरदार वल्लभ भाई पटेल एम्प्लॉयमेंट एंड इंडस्ट्रियल जोन' के लिए 575 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है।

नए बजट से उत्तर प्रदेश में बदलाव की उम्मीदें
यह बजट न केवल प्रदेश की आर्थिक स्थिति को मजबूत करेगा, बल्कि समाज के हर वर्ग को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। युवाओं को डिजिटल दिशा में आगे बढ़ने के लिए नए मौके मिलेंगे, महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए ठोस कदम उठाए जाएंगे, और किसानों को राहत देने के लिए फायदेमंद योजनाओं की शुरुआत की जाएगी। उत्तर प्रदेश के इतिहास में सबसे बड़े इस बजट से प्रदेश का भविष्य उज्जवल दिखता है, खासकर जब यह बजट सार्वजनिक भलाई और समग्र विकास पर केंद्रित है।