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Up Kiran, Digital Desk: प्रयागराज के प्रसिद्ध संगम तट पर चल रहे माघ मेले में जहां लाखों लोग आस्था और साधना में डूबे हुए हैं, वहीं इस बार एक विशेष व्यक्ति ने सबका ध्यान खींचा है। 60 वर्षीय रंजीत सिंह, जो पिछले दो दशकों से अन्न का त्याग करके सिर्फ फलाहार पर जीवन बिता रहे हैं, माघ मेले में एक अनोखे गृहस्थ कल्पवासी के रूप में सामने आए हैं।

एक गृहस्थ की असाधारण साधना

रंजीत सिंह का जीवन एक प्रयोग से शुरू हुआ था, जो अब उनकी स्थायी दिनचर्या बन चुका है। उत्तर प्रदेश के रायबरेली जिले के निवासी रंजीत सिंह भारतीय सेना से हवलदार के रूप में रिटायर हुए हैं। रिटायरमेंट के बाद, 2006 में उन्होंने अन्न का त्याग करने का फैसला लिया और केवल फलाहार पर निर्भर रहने का मार्ग चुना। उनका मानना है कि संतों और महात्माओं की साधना से ही यह प्रेरणा मिली थी कि फलाहार ही शुद्ध आहार है, और यही जीवन को सच्चे रूप में जीने का तरीका है।

आध्यात्मिकता से शारीरिक स्वास्थ्य का मिलाजुला असर

रंजीत सिंह का कहना है कि 60 वर्ष की उम्र में भी वे शारीरिक रूप से बिल्कुल स्वस्थ हैं। उन्हें न तो कोई बीमारी है, न ही शरीर में कोई कमजोरी महसूस होती है। उनका यह विश्वास है कि अत्यधिक अनाज और गलत खानपान से बीमारियों का जन्म होता है। रंजीत सिंह के अनुसार, उनकी सेहत और ऊर्जा का राज उनकी अनुशासित दिनचर्या और फलाहार पर आधारित आहार है। उनका मानना है कि शरीर को शुद्ध और प्राकृतिक आहार देने से मानसिक और शारीरिक दोनों ही प्रकार से स्वास्थ्य लाभ होता है।

संयमित दिनचर्या का महत्व

रंजीत सिंह की दिनचर्या न केवल उनके आहार, बल्कि उनके जीवन के हर पहलू में अनुशासन की झलक दिखाती है। वे सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर संगम में स्नान करते हैं और फिर ध्यान एवं व्यायाम में समय बिताते हैं। दिनभर में वे केवल मौसमी फल जैसे सेब, पपीता, केला, और अमरूद खाते हैं, साथ ही नारियल, मूंगफली, किशमिश और बादाम जैसे सूखे मेवे भी खाते हैं। उनका कहना है, "सरल भोजन से शरीर को अधिक पोषण मिलता है और शरीर स्वस्थ रहता है। नियमित दिनचर्या और संयमित आहार का पालन करना सबसे जरूरी है।"