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Up kiran,Digital Desk : यह बात अब किसी से छिपी नहीं है कि प्लास्टिक हमारी जिंदगी के हर हिस्से में घुस चुका है। हवा, पानी, खाना और यहां तक कि हमारे अपने शरीर के अंदर भी। वैज्ञानिकों ने इंसान के दिमाग, फेफड़ों और मां के गर्भ में पल रहे बच्चे तक को जोड़ने वाली गर्भनाल में भी प्लास्टिक के महीन कण पाए हैं। लेकिन सबसे डरावनी बात यह है कि हमें अब तक ठीक से यह पता भी नहीं है कि यह प्लास्टिक हमारे शरीर को अंदर से कितना खोखला कर रहा है।

ऐसे में सवाल उठता है कि एक आम इंसान खुद को बचाने के लिए आखिर करे तो क्या करे? विशेषज्ञों का मानना है कि आज की दुनिया में प्लास्टिक से पूरी तरह बच निकलना लगभग नामुमकिन है। इसलिए, खुद को बचाने का सबसे असरदार तरीका है कि हम अपनी आदतों को बदलें और समझदारी से प्लास्टिक का इस्तेमाल कम करें।

गर्मी और प्लास्टिक: सबसे खतरनाक जोड़ी

विशेषज्ञ मानते हैं कि प्लास्टिक के बर्तनों और गर्मी का मेल हमारे लिए सबसे बड़ा खतरा है। जब प्लास्टिक गर्म होता है, तो उससे बहुत छोटे-छोटे कण टूटकर हमारे खाने-पीने की चीजों में मिल जाते हैं।

  • किचन में ध्यान दें: कभी भी प्लास्टिक के डिब्बों में खाना गर्म न करें, न ही उनमें कोई गर्म चीज डालकर रखें।
  • कॉफी/चाय के कप: बाहर जो कॉफी या चाय के कप मिलते हैं, उनमें भी अक्सर अंदर प्लास्टिक की एक पतली परत होती है। गर्म चाय या कॉफी उस प्लास्टिक को घोलकर आपके शरीर में पहुंचा सकती है। कोशिश करें कि अपना कप इस्तेमाल करें या कोई बेहतर विकल्प चुनें।

कपड़ों की धुलाई भी फैला रही है ज़हर

यह सुनकर शायद आपको हैरानी हो, लेकिन आपकी वॉशिंग मशीन भी माइक्रोप्लास्टिक फैलाने का एक बड़ा जरिया है। जब हम सिंथेटिक कपड़े (जैसे पॉलिएस्टर, नायलॉन) धोते हैं, तो उनसे बहुत महीन रेशे टूटकर पानी में मिल जाते हैं। यह गंदा पानी नालों से होता हुआ नदियों और फिर खेतों तक पहुंच जाता है, और आखिर में हमारे खाने की थाली तक।

इससे बचने के लिए आप क्या कर सकते हैं?

  • कपड़ों को ठंडे पानी में धोएं।
  • हल्के डिटर्जेंट का इस्तेमाल करें।
  • बाजार में मिलने वाले माइक्रोफाइबर फिल्टर या बॉल का इस्तेमाल करें जो इन रेशों को पानी में घुलने से रोकते हैं।

असली गुनहगार कौन? 60 कंपनियां फैला रहीं आधा प्रदूषण

अक्सर प्लास्टिक प्रदूषण के लिए आम लोगों को जिम्मेदार ठहरा दिया जाता है, लेकिन एक स्टडी बताती है कि दुनिया का लगभग आधा प्लास्टिक प्रदूषण सिर्फ 60 बड़ी कंपनियों की वजह से होता है। ऐसे में, इस संकट से निपटने के लिए बड़े बदलावों की जरूरत है:

  1. सिंगल-यूज प्लास्टिक बंद हो: चिप्स के पैकेट, बोतलें, स्ट्रॉ जैसी चीजें, जिन्हें हम एक बार इस्तेमाल करके फेंक देते हैं, उन पर तुरंत रोक लगनी चाहिए। समुद्र के किनारों पर मिलने वाला ज्यादातर कचरा यही होता है।
  2. रीसाइक्लिंग का सिस्टम सुधरे: हमारा रीसाइक्लिंग का मौजूदा सिस्टम बहुत पुराना और बेकार है। इसे और असरदार बनाने की जरूरत है।
  3. कंपनियों पर दबाव बनाएं: असली बदलाव तभी आएगा जब आम जनता आवाज उठाएगी और कंपनियों और सरकारों पर बेहतर नीतियां बनाने के लिए दबाव डालेगी।

विशेषज्ञ यह भी सवाल उठाते हैं कि आखिर हर छोटी-छोटी चीज को प्लास्टिक की इतनी परतों में क्यों लपेटा जाता है? जिम्मेदारी सिर्फ हमारी नहीं, बल्कि उन उद्योगों की भी है जो अंधाधुंध प्लास्टिक का इस्तेमाल कर रहे हैं।