Up Kiran,Digital Desk: उत्तर प्रदेश में स्टांप पेपर और ई-स्टांपिंग से जुड़ी धोखाधड़ी पर लगाम लगाने के लिए राज्य सरकार ने एक आठ सदस्यीय विशेष समिति का गठन किया है। इस समिति का मुख्य कार्य धोखाधड़ी की मौजूदा स्थिति का विश्लेषण करना और इस समस्या से निपटने के लिए एक मजबूत नीति तैयार करना है। समिति का नेतृत्व अपर आयुक्त स्टांप मनीन्द्र कुमार सक्सेना करेंगे और इसमें विभिन्न जिलों के वरिष्ठ अधिकारी शामिल होंगे।
समिति की जिम्मेदारियां और कार्य
समिति को निम्नलिखित प्रमुख कार्य सौंपे गए हैं:
वर्तमान प्रक्रिया का मूल्यांकन: समिति वर्तमान स्टांप और ई-स्टांपिंग प्रणाली में मौजूद खामियों को पहचानने के लिए एक गहन अध्ययन करेगी।
सुरक्षा बढ़ाना: ई-स्टांपिंग प्रणाली को और अधिक सुरक्षित बनाने के उपायों पर विचार किया जाएगा ताकि किसी भी तरह की धोखाधड़ी की संभावना को खत्म किया जा सके।
क्लोनिंग की समस्या से निपटना: भविष्य में स्टांप पेपर या ई-स्टांप की क्लोनिंग और नकली दस्तावेज़ तैयार करने की प्रक्रिया को रोकने के लिए तकनीकी उपायों को लागू किया जाएगा।
पारदर्शी नीति का मसौदा तैयार करना: राज्यभर में एक समान और पारदर्शी स्टांप नीति का मसौदा तैयार करना, जिसे बाद में लागू किया जाएगा।
क्यों उठाया गया यह कदम?
बीते कुछ वर्षों में उत्तर प्रदेश में स्टांप पेपर और ई-स्टांपिंग से जुड़े बड़े घोटाले सामने आए हैं। इन घोटालों से सरकारी खजाने को लाखों रुपये का नुकसान हुआ है। इसके अलावा, व्यापारिक और कानूनी लेन-देन में भी रुकावटें आई हैं। ऐसे में इस कदम का उद्देश्य सरकार को इन धोखाधड़ी के मामलों से बचाना और डिजिटल लेन-देन की सुरक्षा को सुनिश्चित करना है।



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