Up Kiran, Digital Desk: 21 नवंबर की रात कुशीनगर के रामकोला में एक गरीब परिवार की खुशी मातम में बदल गई। जिला अस्पताल से लौटकर गीतांजलि हॉस्पिटल में महिला ने जुड़वा बच्चों को जन्म दिया लेकिन कुछ ही घंटों बाद उसकी जान चली गई। अब यह मामला पूरे इलाके में लापरवाही और फर्जीवाड़े की मिसाल बन गया है।
बिना ब्लड बैंक के कर दिया हाई-रिस्क ऑपरेशन
जिला अस्पताल ने महिला को हाई रिस्क बताकर वापस भेज दिया था। इसके बावजूद गीतांजलि हॉस्पिटल ने बिना ब्लड बैंक और इमरजेंसी सुविधा के ऑपरेशन कर दिया। डॉक्टरों को पहले से पता था कि बच्चे जुड़वा हैं और रक्तस्राव ज्यादा हो सकता है। फिर भी जोखिम उठाया गया। हालत बिगड़ते ही महिला को कसया के सरस हॉस्पिटल भेजा गया जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
संचालक की डिग्री ही फर्जी निकली
अस्पताल बचाव में जो कागजात पेश कर रहा था उनमें सबसे बड़ा झटका यह लगा कि संचालिका की डिग्री की वैधता ही संदेह में है। पंजीकरण सीएमओ कार्यालय में दिखाया गया जबकि असल पंजीकरण यूपी मेडिकल काउंसिल में होना चाहिए था। एमओआईसी डॉ. एसके विश्वकर्मा ने साफ कहा कि डिग्री की जांच चल रही है और जल्द ही सच सामने आ जाएगा।
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