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Up Kiran, Digital Desk: मध्य पूर्व में तनाव कम होने की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है। लेबनान स्थित सशस्त्र संगठन हिजबुल्लाह ने साफ कर दिया है कि इज़रायल से समझौते के बदले वे अपने हथियार नहीं छोड़ेंगे। संगठन ने कहा है कि लेबनान की सुरक्षा और संप्रभुता की रक्षा के लिए हथियार ज़रूरी हैं और उन्हें त्यागने का सवाल ही नहीं उठता।

कासिम का सख्त बयान

हिजबुल्लाह के वरिष्ठ नेता शेख नईम कासिम ने अल-मनार टीवी पर प्रसारित एक भाषण में कहा कि ये हथियार केवल सुरक्षा ही नहीं, बल्कि सम्मान और गरिमा की रक्षा भी करते हैं। उनके शब्दों में, "जो हमसे हथियार छीनना चाहता है, वह हमारी आत्मा छीनना चाहता है। यह कभी संभव नहीं होगा।"

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि लेबनान सरकार द्वारा संगठन के निरस्त्रीकरण की हालिया मांग किसी स्वतंत्र सोच से नहीं बल्कि अमेरिका और इज़रायल के दबाव में की गई है। कासिम ने चेतावनी दी कि हिजबुल्लाह को कमजोर करने का हर कदम केवल इज़रायल के लिए फायदेमंद साबित होगा और बीते वर्षों में शहीद हुए लड़ाकों तथा नागरिकों के बलिदान के साथ विश्वासघात होगा।

इज़रायल पर सीधा आरोप

अपने संबोधन में कासिम ने स्पष्ट किया कि लेबनान की असली समस्या अमेरिकी समर्थन से इज़रायल द्वारा जारी हमले और कब्ज़े हैं। उनका कहना था कि देश की राजनीतिक और आर्थिक मुश्किलें तभी खत्म हो सकती हैं जब इज़रायल कब्ज़े वाले इलाकों से पीछे हटे, कैदियों को छोड़े और ध्वस्त इलाकों का पुनर्निर्माण हो।

लेबनान सरकार पर निशाना

हिजबुल्लाह नेता ने अपनी ही सरकार पर भी हमला बोला। उन्होंने दावा किया कि मौजूदा मंत्रिमंडल देशहित की रक्षा करने में सक्षम नहीं है। गौरतलब है कि पिछले महीने मंत्री परिषद ने एक प्रस्ताव पारित कर संगठन से इस साल के अंत तक हथियार जमा करने की मांग की थी।

ईरान समर्थित ताकतें

हिजबुल्लाह को अक्सर हमास और यमन के हूती संगठन की तरह ईरान समर्थित उग्रवादी समूह माना जाता है। यही वजह है कि इसकी आड़ में चल रहा इज़रायल और ईरान का परोक्ष संघर्ष पूरे क्षेत्र की स्थिरता पर भारी पड़ रहा है।

 

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