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Up Kiran, Digital Desk: भारत में सेकंड हैंड कपड़े पहनना आम बात है। कई घरों में बड़े भाई-बहन के कपड़े छोटे बच्चों को दिए जाते हैं, तो कुछ लोग थ्रिफ्ट स्टोर्स या सेकंड हैंड मार्केट से कम दामों पर ब्रांडेड कपड़े खरीदते हैं। शादी, ईवेंट या पार्टी में स्टाइलिश दिखने के लिए लोग पुराने या किराए के कपड़े भी चुनते हैं। लेकिन सवाल उठता है – क्या सेकंड हैंड कपड़े पहनना सेहत के लिहाज से सही है?

हाल ही में एक व्यक्ति ने सोशल मीडिया पर यह साझा किया कि सेकंड हैंड कपड़े पहनने की वजह से उसे खतरनाक स्किन इंफेक्शन हो गया। इस घटना ने हजारों लोगों को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि कहीं पैसे बचाने की चाहत उन्हें बीमार तो नहीं बना रही।

 जब सेकंड हैंड कपड़े बने स्किन इंफेक्शन की वजह

एक वायरल वीडियो में एक युवक ने बताया कि उसने एक थ्रिफ्ट स्टोर से सेकंड हैंड कपड़े खरीदे और कुछ समय तक पहनने के बाद उसकी त्वचा पर अजीब दाने निकलने लगे। डॉक्टर से जांच करवाने पर पता चला कि उसे मोलस्कम कॉन्टैगिओसम नामक वायरल स्किन इंफेक्शन हो गया है।

क्या होता है मोलस्कम कॉन्टैगिओसम?

यह एक वायरल स्किन डिज़ीज है जो त्वचा पर छोटे, उभरे हुए, मोती जैसे दानों के रूप में दिखती है।

यह संक्रमण सीधे संपर्क या संक्रमित कपड़ों के माध्यम से फैलता है।

इसका इलाज आसान नहीं होता। 6 महीने से 2 साल तक यह संक्रमण बना रह सकता है।

चेहरे और शरीर की त्वचा पर यह इंफेक्शन दिखने में काफी भद्दा लगता है और आत्मविश्वास को भी कम कर सकता है।

इस केस से ये साफ हो जाता है कि सेकंड हैंड कपड़ों को बिना सावधानी के पहनना आपके लिए भारी पड़ सकता है।

 सेकंड हैंड कपड़े पहनने के साइड इफेक्ट्स

हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक, पुराने और पहने हुए कपड़ों को दोबारा पहनने से कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं:

1. बैक्टीरियल इंफेक्शन

पहने गए कपड़ों में पसीना, मृत त्वचा और गंदगी के कारण बैक्टीरिया पनप सकते हैं। ये आपकी त्वचा में घुसकर संक्रमण फैला सकते हैं।

2. फंगल इंफेक्शन

पसीने और नमी की वजह से सेकंड हैंड कपड़ों में फंगस का खतरा होता है, जिससे खुजली, रैशेज और लाल दाग हो सकते हैं।

3. वायरल इंफेक्शन

जैसे मोलस्कम कॉन्टैगिओसम, हर्पीज सिम्प्लेक्स आदि वायरस इंफेक्टेड फैब्रिक के जरिए आपकी त्वचा तक पहुंच सकते हैं।

4. पैरासिटिक इंफेक्शन

कुछ कपड़ों में जूं, खटमल या अन्य माइक्रो पैरासाइट्स छुपे हो सकते हैं जो आपकी त्वचा पर अटैक कर सकते हैं।

5. स्किन एलर्जी और इरिटेशन

सेकंड हैंड कपड़ों पर लगे डिटर्जेंट, परफ्यूम, पसीना या अन्य केमिकल्स आपकी त्वचा के साथ रिएक्ट करके रेडनेस, जलन और खुजली पैदा कर सकते हैं।

 कैसे करें सेकंड हैंड कपड़ों से बचाव?

अगर आपको किसी कारणवश सेकंड हैंड कपड़े पहनने ही हैं, तो इन सावधानियों को ज़रूर अपनाएं:

कपड़ों को गर्म पानी में अच्छी तरह धोएं और एंटीसेप्टिक मिलाएं।

सूरज की धूप में सुखाएं ताकि बैक्टीरिया और वायरस मर जाएं।

पहनने से पहले कपड़ों को स्टीम आयरन करें।

इनरवेयर, टॉवल, मोजे जैसे कपड़े सेकंड हैंड बिल्कुल न पहनें।

संवेदनशील त्वचा वाले लोग या एलर्जी की प्रवृत्ति रखने वाले लोग सेकंड हैंड कपड़ों से बचें।