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Up kiran,Digital Desk : झारखंड के गोड्डा से भाजपा सांसद निशिकांत दुबे अपने एक विवादित बयान के कारण चौतरफा घिर गए हैं। ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री और महान स्टेट्समैन बीजू पटनायक को लेकर की गई उनकी टिप्पणी ने न केवल राजनीतिक गलियारों में आग लगा दी, बल्कि ओडिशा की सड़कों पर भी भारी जनाक्रोश पैदा कर दिया। मामले की गंभीरता और अपनी ही पार्टी के भीतर बढ़ते विरोध को देखते हुए आखिरकार निशिकांत दुबे को सोशल मीडिया पर बिना शर्त माफी मांगनी पड़ी है।

निशिकांत दुबे का वो बयान जिसने सुलगा दी चिंगारी

निशिकांत दुबे ने मीडिया से बातचीत के दौरान 1960 के दशक के भारत-चीन युद्ध और तिब्बत संकट का जिक्र करते हुए एक सनसनीखेज दावा किया था। उन्होंने कहा था:

"तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने 1962 का युद्ध अमेरिकी धन और सीआईए (CIA) एजेंटों के सहयोग से लड़ा था। ओडिशा के तत्कालीन मुख्यमंत्री बीजू पटनायक, अमेरिकी सरकार, सीआईए और नेहरू के बीच एक कड़ी (Link) का काम करते थे।"

दुबे ने यह भी आरोप लगाया कि ओडिशा का चारबतिया हवाई अड्डा, जिसे बीजू बाबू की देखरेख में विकसित किया गया था, वह अमेरिकी जासूसी विमानों (U2) का अड्डा था और वहां 1979 तक अमेरिकी सेना तैनात थी।

संसद से सड़क तक बीजेडी का 'रणचंडी' रूप

बीजू पटनायक को 'ओडिशा का गौरव' माना जाता है, लिहाजा उनके खिलाफ ऐसी टिप्पणी पर बीजू जनता दल (BJD) ने कड़ा रुख अपनाया। सोमवार को राज्यसभा में बीजेडी सांसदों ने जोरदार हंगामा किया, वहीं ओडिशा विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान बीजेडी, कांग्रेस और माकपा के सदस्यों ने भाजपा सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारी छात्रों और युवाओं ने सड़कों पर उतरकर निशिकांत दुबे का पुतला फूंका और उनके खिलाफ निंदा प्रस्ताव पारित करने की मांग की।

बैकफुट पर सांसद: 'बिना शर्त क्षमा चाहता हूं'

चौतरफा दबाव और ओडिशा भाजपा के नेताओं की नाराजगी के बाद निशिकांत दुबे ने 'X' (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी सफाई पेश की। उन्होंने लिखा कि उनके बयान का गलत अर्थ निकाला गया और उनके विचार नेहरू-गांधी परिवार के संदर्भ में थे। उन्होंने स्पष्ट किया:

"बीजू बाबू हमारे लिए हमेशा ऊंचे कद के स्टेट्समैन रहे हैं और रहेंगे।"

"नेहरू जी के ऊपर मेरे विचार को बीजू बाबू के ऊपर समझा गया।"

"मेरे वक्तव्य से यदि भावनाएं आहत हुई हैं तो मैं बिना शर्त क्षमा चाहता हूं।"

ओडिशा विधानसभा में मचा घमासान

मंगलवार को ओडिशा विधानसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने इस मुद्दे पर राज्य की भाजपा सरकार को घेरा। विधानसभा अध्यक्ष सुरमा पाधी को भारी शोर-शराबे के कारण सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी। विपक्षी दलों का कहना है कि बीजू पटनायक जैसे नायक का अपमान ओडिशा की अस्मिता का अपमान है और केवल माफी से काम नहीं चलेगा।