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Up Kiran, Digital Desk: आपने अक्सर घर में अपनी माँ या दादी को यह कहते सुना होगा कि आज घर में पूजा है या किसी का व्रत है, इसलिए खाने में प्याज और लहसुन नहीं पड़ेगा। कभी सोचा है कि खाने का स्वाद बढ़ाने वाली ये दो आम सी चीज़ें, भगवान के भोग या व्रत के खाने से बाहर क्यों हो जाती हैं? इसके पीछे सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि गहरे वैज्ञानिक और आध्यात्मिक कारण छिपे हैं।

खाने की तीन श्रेणियाँ: जैसा अन्न, वैसा मन

हमारे शास्त्रों और आयुर्वेद में भोजन को तीन श्रेणियों में बांटा गया है- सात्विक, राजसिक और तामसिक।

सात्विक भोजन: यह सबसे शुद्ध भोजन माना जाता है, जैसे फल, सब्ज़ियाँ, दूध, घी और मेवे। ऐसा भोजन मन को शांत, एकाग्र और पवित्र रखता है।

राजसिक भोजन: यह भोजन बहुत ज़्यादा तला हुआ, मसालेदार और चटपटा होता है। यह शरीर में बेचैनी, तनाव और वासनाओं को बढ़ाता है।

तामसिक भोजन: बासी, बहुत ज़्यादा पका हुआ और दुर्गंध वाला भोजन इस श्रेणी में आता है। प्याज और लहसुन को भी इसी श्रेणी में रखा गया है। ऐसा माना जाता है कि ये शरीर में आलस्य, क्रोध, और अज्ञानता को बढ़ाते हैं।

जब हम पूजा या व्रत करते हैं, तो हमारा लक्ष्य अपने मन को शांत और भगवान के करीब ले जाना होता है। प्याज-लहसुन जैसे तामसिक भोजन हमारे मन को भटका सकते हैं और पूजा में एकाग्रता नहीं बनने देते। इसीलिए इन्हें व्रत के दौरान खाने की मनाही होती है।

इसके पीछे एक पौराणिक कहानी भी है

एक बहुत ही प्रचलित कहानी समुद्र मंथन से जुड़ी हुई है। जब समुद्र मंथन से अमृत निकला, तो भगवान विष्णु मोहिनी रूप धारण करके देवताओं को अमृत पिला रहे थे। तभी दो राक्षस, राहु और केतु, धोखा देकर देवताओं की लाइन में बैठ गए और अमृत पी लिया।

जैसे ही सूर्यदेव और चंद्रदेव ने यह देखा, उन्होंने भगवान विष्णु को बता दिया। भगवान ने तुरंत अपने सुदर्शन चक्र से उन दोनों राक्षसों का सिर धड़ से अलग कर दिया। क्योंकि उन्होंने अमृत पी लिया था, वे मरे तो नहीं, लेकिन उनके कटे हुए सिरों से रक्त की कुछ बूँदें ज़मीन पर गिरीं। कहते हैं कि उन्हीं बूँदों से प्याज और लहसुन की उत्पत्ति हुई।

क्योंकि इनकी उत्पत्ति एक राक्षस के शरीर से हुई है, इनमें अमृत का अंश होने के बावजूद राक्षसी गुण और तेज़ गंध होती है। इसी वजह से इन्हें अपवित्र माना जाता है और भगवान को भोग में अर्पित नहीं किया जाता।

तो अगली बार जब कोई आपसे यह सवाल पूछे, तो आप उसे बता सकते हैं कि प्याज-लहसुन न खाना सिर्फ एक अंधविश्वास नहीं, बल्कि मन को साधने और भक्ति में लीन होने का एक वैज्ञानिक और आध्यात्मिक तरीका है।

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