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भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र (UN) पर बड़ा सवाल खड़ा किया है। उन्होंने साफ शब्दों में कहा है कि आज की दुनिया में यूएन वो काम नहीं कर पा रहा है, जिसके लिए उसे बनाया गया था। वह आज की वैश्विक प्राथमिकताओं, जैसे कि आतंकवाद, महामारी और जलवायु परिवर्तन जैसी गंभीर समस्याओं से निपटने में पूरी तरह से नाकाम साबित हो रहा है।

"80 साल पुरानी सोच से नहीं चल सकती आज की दुनिया"

न्यूयॉर्क में काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस (CFR) में बोलते हुए, जयशंकर ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र की सबसे बड़ी समस्या यह है कि यह आज भी 80 साल पुरानी सोच पर चल रहा है। उन्होंने कहा, "जब यूएन बना था, तब दुनिया बहुत अलग थी। आज दुनिया पूरी तरह से बदल चुकी है, लेकिन यूएन बदलने को तैयार नहीं है।"

उन्होंने जोर देकर कहा कि आज दुनिया की सबसे बड़ी जरूरतें रोटी, कपड़ा, मकान, स्वास्थ्य और शिक्षा हैं, लेकिन यूएन इन मुद्दों पर उतना ध्यान नहीं दे रहा है, जितना उसे देना चाहिए।

बदलते वर्ल्ड ऑर्डर पर क्या बोले जयशंकर?

विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि अब दुनिया का नेतृत्व सिर्फ कुछ देशों के हाथ में नहीं रह गया है। आज दुनिया में कई ताकतें उभर रही हैं, जिनमें भारत भी एक है। उन्होंने कहा, "यह एक बहुध्रुवीय दुनिया (multi-polar world) है, जहां कई देशों का दबदबा है। ऐसे में हमें उन संस्थाओं की जरूरत है जो इस नई सच्चाई को स्वीकार करें।"

जयशंकर ने इशारों-इशारों में चीन और कुछ पश्चिमी देशों पर भी निशाना साधा जो यूएन में किसी भी तरह के बदलाव का विरोध करते हैं। उन्होंने कहा कि जो देश आज शक्तिशाली हैं, वो अपनी ताकत छोड़ना नहीं चाहते, इसलिए वो यूएन को बदलने नहीं दे रहे हैं।

यह पहली बार नहीं है जब भारत ने यूएन में सुधारों की मांग की है। भारत लंबे समय से कह रहा है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भारत को एक स्थायी सदस्य के रूप में शामिल किया जाना चाहिए ताकि यह संस्था आज की दुनिया की हकीकत को बेहतर ढंग से दर्शा सके।