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वेनेजुएला में लोकतंत्र की बहाली के लिए एक लंबा और कठिन संघर्ष करने वालीं और इस साल (2025) की नोबेल शांति पुरस्कार विजेता, मारिया कोरिना माचाडो ने भारत की जमकर तारीफ की है। उन्होंने भारत को दुनिया के लिए एक 'मॉडल लोकतंत्र' बताते हुए उम्मीद जताई है कि वेनेजुएला में तानाशाही को खत्म करने और लोकतंत्र को फिर से स्थापित करने की उनकी लड़ाई में भारत एक प्रमुख सहयोगी (key ally) बन सकता है।

मारिया माचाडो, जिन्हें वेनेजुएला की 'आयरन लेडी' भी कहा जाता  ने यह बातें हाल ही में एक अंतरराष्ट्रीय मंच पर कहीं। उन्होंने वेनेजुएला के मौजूदा हालात पर चिंता जताते हुए कहा कि उनका देश एक क्रूर तानाशाही के चंगुल में है, और इससे बाहर निकलने के लिए उन्हें भारत जैसे मजबूत और स्थिर लोकतंत्रों के साथ की जरूरत है।

भारत को क्यों बताया 'मॉडल'?

माचाडो का मानना है कि भारत दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे जीवंत लोकतंत्र है। भारत ने जिस तरह से अपनी लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत किया है, अपनी विविधता को बनाए रखा और एक स्वतंत्र चुनाव प्रक्रिया को कायम रखा है, वह वेनेजुएला जैसे देशों के लिए एक बहुत बड़ी प्रेरणा है जो लोकतंत्र के लिए संघर्ष कर रहे ।

उन्होंने कहा, "भारत सिर्फ एक देश नहीं, बल्कि एक विचार है। यह दिखाता है कि कैसे करोड़ों लोग शांति, सद्भाव और लोकतांत्रिक मूल्यों के साथ रह सकते हैं। हम भारत की ओर एक मॉडल के रूप में देखते।"

वेनेजुएला के लिए भारत से क्या हैं उम्मीदें?

मारिया माचाडो ने वेनेजुएला के पुनर्निर्माण में भारत की भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि एक बार जब वेनेजुएला तानाशाही से मुक्त हो जाएगा, तो देश को फिर से खड़ा करने के लिए उन्हें भारत जैसे दोस्तों के अनुभव, टेक्नोलॉजी और निवेश की जरूरत पड़ेगी।

उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब वह निकोलस मादुरो की सरकार के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने की कोशिश कर रही। नोबेल शांति पुरस्कार मिलने के बाद उनकी आवाज को दुनिया भर में और भी गंभीरता से सुना जा रहा है। अब देखना यह होगा कि लोकतंत्र की इस लड़ाई में भारत, वेनेजुएला की मदद के लिए कैसे आगे आता है।