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Up kiran,Digital Desk : छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के खिलाफ चल रही लड़ाई में सुरक्षाबलों को एक ऐसी कामयाबी मिली है, जिसे ऐतिहासिक कहा जा रहा है। तीन राज्यों की पुलिस के लिए सिरदर्द बन चुका 1 करोड़ का इनामी नक्सली कमांडर रामधेर मज्जी अब सलाखों के पीछे नहीं, बल्कि सरकार की शरण में है।

रामधेर ने अपने 11 और साथियों के साथ मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और गृह मंत्री विजय शर्मा के सामने हथियार डाल दिए हैं। सरेंडर करने वालों में 6 महिला नक्सली भी शामिल हैं, जो दिखाता है कि अब संगठन के अंदर सब कुछ ठीक नहीं है।

क्यों है यह सरेंडर इतना बड़ा?

  • हथियारों के साथ सरेंडर: इन नक्सलियों ने सिर्फ हाथ नहीं उठाए, बल्कि AK-47 जैसे खतरनाक हथियारों के साथ सरेंडर किया है।
  • बड़े कैडर का टूटना: रामधेर के साथ सरेंडर करने वालों में DVCM और ACM रैंक के कई बड़े कमांडर भी शामिल हैं, जो संगठन के लिए एक बहुत बड़ा झटका है।

सरकार की नीति ला रही है रंग

यह कोई अचानक मिली कामयाबी नहीं है, बल्कि इसके पीछे सरकार की 'पूना मारगेम' (पुनर्वास से पुनर्जीवन) और 'लोन वर्राटू' (घर वापस आइए) जैसी नीतियां काम कर रही हैं। इन अभियानों के तहत नक्सलियों को हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।

आंकड़े खुद इसकी गवाही देते हैं:

पिछले 20 महीनों में 508 से ज्यादा नक्सली हथियार डाल चुके हैं।

'लोन वर्राटू' अभियान के तहत अब तक 1160 नक्सली मुख्यधारा में लौट चुके हैं।

यह सरेंडर उन सैकड़ों जवानों की शहादत को एक श्रद्धांजलि है, जिन्होंने नक्सलवाद से लड़ते हुए अपनी जान गंवाई। यह शांति की दिशा में एक बहुत बड़ा और उम्मीद भरा कदम है, जो बताता  छत्तीसगढ़ में अब बदलाव की हवा बह रही है।