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Up Kiran,Digital Desk: अहमदाबाद विमान दुर्घटना की दुखद यादें अभी ताज़ा थीं कि महाराष्ट्र के बारामती से एक और विमान हादसे की खबर सामने आई। इस बार, महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम सहित 6 लोग इस हादसे का शिकार हो गए। विमान आग की लपटों में घिरा हुआ था, और घटनास्थल पर खौ़फनाक दृश्य सामने आए। यह हादसा न सिर्फ राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण था, बल्कि यह भी हमारे हवाई सुरक्षा प्रणालियों पर सवाल खड़ा करता है।

कभी खत्म नहीं होने वाली चिंता

इस दुखद घटना ने एक बार फिर सवाल उठाया है कि विमानों में हादसे क्यों होते हैं, खासकर टेकऑफ और लैंडिंग के दौरान? क्या इन हादसों को टाला जा सकता है? जब इस पर गौर किया गया, तो आंकड़े बेहद चौंकाने वाले हैं, और यह हमारे लिए चिंता का विषय बन चुके हैं।

क्या कहते हैं विमान हादसों के आंकड़े?

इंटरनेशनल एयर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (IATA) के आंकड़ों के मुताबिक, 2005 से 2023 तक लगभग 53% विमान हादसे लैंडिंग के समय हुए। वहीं टेकऑफ के दौरान हादसे 8.5% थे। अगर हम बोइंग के डेटा को देखें तो, 2015 से 2024 के बीच कॉमर्शियल जेट्स के लिए लैंडिंग फेज में 47% दुर्घटनाएं और टेकऑफ फेज में 20% दुर्घटनाएं सामने आईं। ये आंकड़े इस बात की पुष्टि करते हैं कि टेकऑफ और लैंडिंग के दौरान विमान हादसों का खतरा सबसे ज्यादा होता है।

क्यों होती हैं लैंडिंग और टेकऑफ के दौरान दुर्घटनाएं?

लैंडिंग और टेकऑफ विमान के सबसे संवेदनशील क्षण होते हैं। इस दौरान विमान कम ऊंचाई पर होता है, जिससे पायलट को स्थिति को नियंत्रित करने के लिए बहुत कम समय मिलता है। आसान शब्दों में कहें तो, जैसे ही विमान हवा में उठता है या नीचे आता है, पायलट को हर फैसले में बहुत सतर्क रहना पड़ता है। इन चरणों में जोखिम अधिक होता है क्योंकि स्थिति की जटिलता बढ़ जाती है।

क्या कहती है रिपोर्ट?

बिजनेस इनसाइडर की एक रिपोर्ट के अनुसार, जब विमान 36,000 फीट की ऊंचाई पर पहुंचता है, तो यह क्रूज फेज में होता है। इस दौरान पायलट के पास विमान की दिशा को नियंत्रित करने का पर्याप्त समय और स्थान होता है। यदि दोनों इंजन भी काम करना बंद कर दें, तो विमान गिरने के बजाय एक ग्लाइडर बन जाता है। पायलट को इस स्थिति में लगभग 8 मिनट का समय मिल सकता है, जिससे वह विमान को सुरक्षित रूप से उतार सकता है।

लेकिन टेकऑफ और लैंडिंग के दौरान पायलट के पास इतना समय नहीं होता। यही वजह है कि इन दोनों चरणों में दुर्घटनाओं की संभावना ज्यादा होती है।