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Up Kiran, Digital Desk: कभी ऑफिस की लिफ्ट में खड़े होकर सोचा है कि ये बड़ा सा शीशा आखिर लगाया ही क्यों जाता है? ज्यादातर लोग तो इसे डेकोरेशन समझकर निकल जाते हैं लेकिन सच ये है कि ये शीशा आपकी सुरक्षा, सुविधा और मानसिक सुकून के लिए खास तौर पर डिजाइन किया गया है। चलिए आज आपको बताते हैं इसके पीछे की असली वजहें जो शायद आपने कभी नोटिस ही न की हों।

व्हीलचेयर वालों का सबसे बड़ा साथी

छोटी सी लिफ्ट में व्हीलचेयर घुमाना अपने आप में मुश्किल काम है। पीछे जाना हो या टर्न लेना हो तो जगह की कमी परेशान करती है। ऐसे में पीछे लगा शीशा पूरा नजारा दिखा देता है। यूजर को बिना मुड़े पता चल जाता है कि दरवाजा कहां है और कितनी जगह बची है। नतीजा? सुरक्षित और आत्मविश्वास भरा मूवमेंट।

क्लॉस्ट्रोफोबिया को भगाने का आसान तरीका

लिफ्ट का बंद केबिन कई लोगों को घुटन देता है। दो मिनट भी भारी लगते हैं। शीशा लगते ही स्पेस दोगुना दिखने लगता है। दीवारें दूर चली जाती हैं और दिमाग को लगता है कि जगह खुली हुई है। अपना चेहरा देखकर अचानक अजनबी फील नहीं होता। मन अपने आप शांत पड़ जाता है। यही कारण है कि शीशे वाली लिफ्ट में चढ़ते ही तनाव कम हो जाता है।

रात में अकेले भी डर नहीं लगता

खाली लिफ्ट में पीछे कोई खड़ा हो तो पता कैसे चलेगा? शीशा पूरी केबिन को मॉनिटर की तरह काम करता है। हर कोना साफ दिखता है। महिलाएं हो या बुजुर्ग, रात के वक्त या सुनसान बिल्डिंग में ये शीशा अतिरिक्त सिक्योरिटी लेयर देता है। लोग एक दूसरे को देख पाते हैं तो गलत इरादे रखने वाले भी हिचकिचाते हैं।

बोरिंग सफर को मजेदार बना देता है

10-15 सेकंड की लिफ्ट जर्नी कभी कभी घंटों जैसी लगती है। खाली दीवारें देखते रहो तो ऊब जाएंगे। शीशा आते ही लोग अपने बाल ठीक करने लगते हैं, मुस्कुराने लगते हैं, ड्रेस चेक करते हैं। टाइम पास हो जाता है और पता ही नहीं चलता कब फ्लोर आ गया।

लाइट और लुक दोनों दोगुने कर देता है

शीशा लाइट को रिफ्लेक्ट करके छोटी लिफ्ट को चमकदार और बड़ा बना देता है। पुरानी बिल्डिंग की फीकी लिफ्ट भी अचानक मॉडर्न लगने लगती है। साफ सुथरा माहौल बनता है और अंदर कदम रखते ही अच्छा फील होता है।

रोज की छोटी-छोटी परेशानियां खत्म

लिफ्ट में घुसते ही ज्यादातर लोग सबसे पहले अपना चेहरा देखते हैं। टाई ठीक कर ली, लिपस्टिक चेक कर ली, बाल संभाल लिए। साथ ही जब सबको एक दूसरे की मूवमेंट दिख रही होती है तो कोई धक्का नहीं लगता, कोई टकराता नहीं। सब कुछ स्मूथ चलता है।