img

Up kiran,Digital Desk : भारतीय वायुसेना के विंग कमांडर दुर्लभ भट्टाचार्य की मौत को सेना की ड्यूटी से जोड़ते हुए एएफटी ने बड़ा फैसला सुनाया है। ट्रिब्यूनल ने कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी की रिपोर्ट रद्द कर दी, जिसमें उनकी मृत्यु को सैन्य सेवा से संबंधित नहीं माना गया था। अब उनकी पत्नी अनुराधा भट्टाचार्य को विशेष पारिवारिक पेंशन देने का आदेश दिया गया।

कैसे हुई थी विंग कमांडर दुर्लभ भट्टाचार्य की मृत्यु

विंग कमांडर दुर्लभ भट्टाचार्य को दिसंबर 2006 में वायुसेना में कमीशन मिला था। 7 फरवरी 2021 को तमिलनाडु की एमराल्ड झील में पारिवारिक पिकनिक के दौरान कुछ बच्चे डूबने लगे। उन्होंने तुरंत पानी में छलांग लगाकर एक बच्चे की जान बचाई। इसके बाद वह अपनी बेटी को ढूंढने के लिए दोबारा झील में उतरे, लेकिन इसी दौरान उनका डूबने से निधन हो गया।

ट्रिब्यूनल ने क्या कहा: ड्यूटी सिर्फ वर्दी या समय तक सीमित नहीं

एएफटी ने कहा:

ड्यूटी केवल दफ्तर या तय समय तक नहीं होती।

वर्दीधारी कर्मियों की जिम्मेदारी 24 घंटे और हर जगह रहती है।

किसी की जान बचाना सेना की मूल भावना से जुड़ा है।

पिकनिक जैसे अनौपचारिक मौके पर मौजूद होना ड्यूटी से अलग नहीं करता।

काम की प्रकृति अहम है, जगह या समय नहीं।

क्यों रद्द हुई कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी की रिपोर्ट

एएफटी ने माना कि कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी ने ‘ऑन ड्यूटी’ शब्द की संकीर्ण व्याख्या की। ट्रिब्यूनल के अनुसार, यह गलत था कि अधिकारी उस समय ड्यूटी पर नहीं थे। साहस और जान जोखिम में डालना सैन्य सेवा का हिस्सा है।

पत्नी की दलील और सरकारी पक्ष

याचिका में अनुराधा भट्टाचार्य ने कहा कि उनके पति छुट्टी पर नहीं थे और हर समय सेवा अनुशासन के दायरे में थे। नागरिकों की जान बचाना सेना के मूल सिद्धांतों में शामिल है।
सरकारी पक्ष ने तर्क दिया कि दुर्घटना में विशेष पारिवारिक पेंशन का प्रावधान नहीं है। ट्रिब्यूनल ने इसे अस्वीकार कर दिया।

मिसाल बनेगा यह फैसला

यह निर्णय सिर्फ एक परिवार के लिए न्याय नहीं है, बल्कि भविष्य में ऐसे मामलों के लिए मिसाल बनेगा। ट्रिब्यूनल ने स्पष्ट कर दिया कि साहस, कर्तव्य और बलिदान का मूल्य समय और स्थान से तय नहीं होता। यह फैसला उन सभी वर्दीधारी कर्मियों के सम्मान को मजबूत करता है, जो हर हाल में समाज की रक्षा के लिए तत्पर रहते हैं।