Up kiran,Digital Desk : अफगानिस्तान में कुदरत का कहर थमने का नाम नहीं ले रहा है। बीते तीन दिनों से जारी भीषण बर्फबारी और मूसलाधार बारिश ने देश के बड़े हिस्से को अपनी चपेट में ले लिया है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, इस आपदा में अब तक 61 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 110 से अधिक लोग घायल बताए जा रहे हैं। हालात ऐसे हैं कि कई इलाकों में राहत और बचाव कार्य तक पहुंच पाना मुश्किल हो गया है।
15 प्रांत प्रभावित, गांवों का संपर्क टूटा
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार, अफगानिस्तान के 34 में से 15 प्रांत इस भीषण मौसम से प्रभावित हुए हैं। सैकड़ों गांव बर्फ से घिर गए हैं और कई मुख्य सड़कें पूरी तरह बंद हो चुकी हैं। दुर्गम और पहाड़ी इलाकों में फंसे लोगों तक मदद पहुंचाना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है।
458 घर तबाह, हजारों लोग बेघर
आपदा प्रबंधन विभाग के प्रवक्ता यूसुफ हम्माद ने बताया कि अब तक 458 घर पूरी तरह या आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। बड़ी संख्या में पशुधन की भी मौत हुई है, जिससे पहले से आर्थिक तंगी झेल रहे ग्रामीण परिवारों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। अधिकारियों का कहना है कि जैसे-जैसे दूरदराज क्षेत्रों से सूचनाएं मिलेंगी, मृतकों और घायलों की संख्या में और इजाफा हो सकता है।
हर साल जानलेवा बनता मौसम
अफगानिस्तान लंबे समय से चरम मौसम घटनाओं के प्रति बेहद संवेदनशील रहा है। अचानक बाढ़, भारी बारिश और तेज बर्फबारी यहां हर साल दर्जनों से लेकर सैकड़ों लोगों की जान ले लेती है। कमजोर बुनियादी ढांचा, गरीबी और कच्चे मकानों की अधिकता हालात को और गंभीर बना देती है।
2024 की बाढ़ और भूकंप की त्रासदी अब भी ताजा
बीते वर्ष 2024 में वसंत ऋतु के दौरान आई बाढ़ में 300 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी। इसके अलावा अगस्त और नवंबर में आए भीषण भूकंपों ने देश के पूर्वी हिस्सों को बुरी तरह झकझोर दिया था, जिनमें 2,200 से अधिक लोगों की जान गई और हजारों परिवार बेघर हो गए। कई इलाके अब तक उन आपदाओं से उबर नहीं पाए हैं।
मानवीय संकट गहराया, बच्चों पर सबसे बड़ा खतरा
यूनिसेफ के अनुसार, भूकंप और मौसम प्रभावित क्षेत्रों में करीब 2.7 लाख बच्चे जानलेवा ठंड, भूख और बीमारियों के गंभीर खतरे में हैं। वहीं, संयुक्त राष्ट्र पहले ही चेतावनी दे चुका है कि 2026 तक अफगानिस्तान दुनिया के सबसे बड़े मानवीय संकटों में शामिल रह सकता है। जरूरतमंदों की मदद के लिए संयुक्त राष्ट्र और उसके सहयोगी संगठनों ने 1.7 अरब डॉलर की आपात अपील जारी की है, ताकि लगभग 1.8 करोड़ लोगों तक राहत पहुंचाई जा सके।
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