8 नवंबर से पहले घर से निकाल फेंकें ये चीजें, एक छोटी सी भूल और खाली हो सकती है तिजोरी
रोशनी के महापर्व दिवाली की तैयारियों ने जोर पकड़ लिया है और घरों में साफ-सफाई से लेकर साज-सज्जा का दौर शुरू हो चुका है। पारंपरिक मान्यताओं और वास्तु शास्त्र के मुताबिक, मां लक्ष्मी के आगमन के लिए घर का सुव्यवस्थित, रोशन और नकारात्मकता मुक्त होना बेहद अहम माना जाता है। दिवाली 2026 रविवार, 8 नवंबर को मनाई जाएगी। इस पावन अवसर पर इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ वैदिक साइंस (IIVS) के चेयरमैन गुरुदेव विक्रांत जैन ने उन सात आम वास्तु गलतियों से आगाह किया है, जिन्हें लोग अक्सर सफाई और सजावट के दौरान अनजाने में दोहरा बैठते हैं।
1. सिर्फ दिखने वाली जगहों की सफाई करना
लोग अक्सर लिविंग रूम, हॉल या मुख्य कमरों की सफाई तो कर लेते हैं, लेकिन बंद पड़े स्टोरेज एरिया, अटारी और कमरों के छुपे हुए कोनों को नजरअंदाज कर देते हैं। वास्तु के अनुसार, इन अनदेखी जगहों पर जमा पुराना कबाड़ और फालतू सामान नकारात्मक ऊर्जा को बांधता है। अलमारियों को छांटना और गैर-जरूरी चीजों को बाहर निकालना घर में नई ऊर्जा का संचार करता है।
2. मुख्य द्वार पर अव्यवस्था और अंधेरा रखना
घर का मुख्य प्रवेश द्वार देवी लक्ष्मी के प्रवेश का रास्ता माना जाता है। ऐसे में प्रवेश द्वार पर जूते-चप्पलों का ढेर, पुराना सामान या कम रोशनी होना बड़ा वास्तु दोष पैदा करता है। मेन गेट को हमेशा साफ-सुथरा रखें, वहां पर्याप्त रोशनी का इंतजाम करें और पारंपरिक तरीके से तोरण (बंदनवार) व रंगोली से सजाएं।
3. घर में टूटी-फूटी और बेकार चीजें सहेजना
खराब इलेक्ट्रॉनिक सामान, टूटे बर्तन, चटके कांच या बंद घड़ियों को संभाल कर रखना वास्तु सम्मत नहीं है। दिवाली की पूजा से पहले ऐसे सभी गैर-उपयोगी और टूटे सामान को घर से हटा दें या मरम्मत करवा लें। इससे घर में खुलापन आता है और व्यवस्था सुधरती है।
4. किचन और बाथरूम की अनदेखी करना
घर की समृद्धि और स्वास्थ्य का सीधा संबंध रसोई और बाथरूम से होता है। चूल्हे पर जमी गंदगी और नलों से पानी का टपकना आर्थिक नुकसान और ऊर्जा के क्षरण का प्रतीक माना जाता है। त्योहार से पहले प्लंबिंग की किसी भी लीकेज को तुरंत ठीक करवाएं और दोनों जगहों की गहरी सफाई सुनिश्चित करें।
5. पूजा घर को अत्यधिक सामान से भरना
पूजा स्थल को सजाने की चाह में कई बार लोग वहां जरूरत से ज्यादा मूर्तियां, तस्वीरें और भारी सजावटी सामान भर देते हैं। वास्तु नियम कहते हैं कि मंदिर का स्थान हमेशा हल्का, खुला और व्यवस्थित होना चाहिए। केवल आवश्यक पूजा सामग्री और आराध्य देवों की मूर्तियों को ही सम्मानपूर्वक रखें।
6. सूर्यास्त के बाद झाड़ू लगाना और कचरा फेंकना
लोक मान्यताओं में शाम के समय घर की चौखट से झाड़ू लगाना या कचरा बाहर फेंकना समृद्धि को विदा करने जैसा माना गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, सफाई का सारा मुख्य काम सूरज ढलने से पहले पूरा कर लें। यदि शाम को कुछ गिर भी जाए, तो हल्के से समेट लें और कचरा अगली सुबह ही बाहर करें।
7. पूजा स्थल में गहरे या फीके रंगों का चुनाव
लक्ष्मी पूजन के स्थान पर काले, गहरे नीले या एकदम फीके रंगों का उपयोग करने से बचना चाहिए। इसके बजाय लाल, पीले, सुनहरे या हल्के चमकीले रंगों का प्रयोग करें। दीवारों पर रंग न बदल सकें तो भी वेदी पर लाल या पीला नया वस्त्र बिछाकर, ताजे गेंदे के फूलों और देसी घी के दीपों से मंदिर को सजाया जा सकता है।
दिवाली 2026: पूजा पूर्व जरूरी चेकलिस्ट
मुख्य द्वार के फ्यूज बल्ब तुरंत बदलें, बंद अलमारियों और कबाड़ वाले कोनों को खाली करें, घर का टूटा फर्नीचर या उपकरण बाहर निकालें, किचन के लीकेज ठीक करें, मंदिर को साफ और हल्का रखें तथा अपनी पूरी सफाई दिन के उजाले में ही निपटाएं।