न रजिस्टर, न ऐप... यहां माचिस की डिब्बियों से अटेंडेंस लगाते हैं बच्चे, टीचर का अनोखा तरीका वायरल
सरकारी स्कूलों में बच्चों की उपस्थिति (अटेंडेंस) बढ़ाना और उन्हें पढ़ाई के प्रति आकर्षित करना हमेशा से एक बड़ी चुनौती रहा है। इसके लिए सरकारें तरह-तरह के डिजिटल ऐप्स और भारी-भरकम रजिस्टर का सहारा लेती हैं। लेकिन देश के एक सरकारी स्कूल के शिक्षक ने इस समस्या का ऐसा अनूठा और देसी जुगाड़ निकाला है, जिसने सोशल मीडिया पर धूम मचा दी है। इस स्कूल में न तो हाजिरी के लिए किसी महंगे रजिस्टर की जरूरत पड़ती है और न ही किसी मोबाइल ऐप की। यहां बच्चे रोज सुबह स्कूल आते ही माचिस की डिब्बियों (Matchboxes) की मदद से अपनी अटेंडेंस दर्ज करते हैं। शिक्षक का यह क्रिएटिव आइडिया इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहा है और लोग इसे शिक्षा के क्षेत्र में एक बेहतरीन इनोवेशन मान रहे हैं।
कबाड़ से जुगाड़: कैसे काम करता है अटेंडेंस का यह देसी तरीका
अक्सर लोग खाली माचिस की डिब्बियों को कचरा समझकर फेंक देते हैं, लेकिन इस सरकारी स्कूल के क्लास टीचर ने इसी कबाड़ को एक बेहतरीन टीचिंग और मैनेजमेंट टूल बना दिया। शिक्षक ने क्लासरूम की दीवार पर एक सुंदर चार्ट पेपर लगाया है, जिस पर सभी बच्चों के नाम और रोल नंबर लिखे हैं। हर बच्चे के नाम के आगे माचिस की एक खाली डिब्बी चिपकाई गई है। इस डिब्बी के अंदर बच्चे के नाम की एक छोटी सी पर्ची या तीली रखी होती है। रोज सुबह जब बच्चे क्लास में आते हैं, तो वे अपनी डिब्बी को खोलकर अपनी उपस्थिति खुद दर्ज करते हैं। यह तरीका पूरी तरह से 'लर्निंग बाय डूइंग' और खेल-खेल में अनुशासन सिखाने पर आधारित है।
बच्चों में बढ़ा स्कूल आने का क्रेज और बदला माहौल
इस अनोखे प्रयोग का सबसे सकारात्मक असर स्कूल के बच्चों पर देखने को मिल रहा है। पहले जो बच्चे स्कूल आने में आनाकानी करते थे, अब वे सिर्फ अपनी माचिस वाली अटेंडेंस लगाने के उत्साह में रोज समय पर स्कूल पहुंच रहे हैं। इस तरीके ने क्लासरूम के डर और बोरियत वाले माहौल को पूरी तरह से एक मजेदार एक्टिविटी में बदल दिया है। बच्चों के लिए यह एक गेम की तरह है, जिससे उनमें जिम्मेदारी की भावना भी विकसित हो रही है। ग्रामीण इलाकों के स्कूलों के लिए यह मॉडल बेहद किफायती और प्रभावी साबित हो रहा है, जहां महंगे डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी होती है।
सोशल मीडिया पर तारीफों के पुल, लोग बोले- 'यही हैं असली गुरुजी'
जब इस अनोखे अटेंडेंस सिस्टम की तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर शेयर किए गए, तो यह देखते ही देखते वायरल हो गया। आईएएस अधिकारियों से लेकर आम इंटरनेट यूजर्स तक, हर कोई इस सरकारी शिक्षक की सोच और क्रिएटिविटी की जमकर तारीफ कर रहा है। यूजर्स का कहना है कि बिना किसी बजट और बिना किसी तामझाम के, बच्चों को स्कूल से जोड़ने का यह सबसे शानदार तरीका है। लोग इसे 'स्मार्ट क्लास' का असली और व्यावहारिक रूप बता रहे हैं, जो सीधे जमीन से जुड़ा हुआ है।