कुत्ते के काटने पर भूलकर भी न लगाएं हल्दी-तेल: डॉक्टर ने बताए 4 जरूरी कदम, वरना जानलेवा हो सकता है रेबीज

कुत्ते के काटने पर भूलकर भी न लगाएं हल्दी-तेल: डॉक्टर ने बताए 4 जरूरी कदम, वरना जानलेवा हो सकता है रेबीज

सुबह की सैर हो या गली-मोहल्ले से गुजरना, आवारा या पालतू कुत्ते के हमले की घटनाएं अक्सर सामने आती रहती हैं। अमूमन देखा जाता है कि लोग चोट लगते ही घर में रखी हल्दी, सरसों का तेल, मिर्च या मिट्टी लगाकर घाव को कपड़े से बांध लेते हैं। मगर चिकित्सा विशेषज्ञों की मानें तो कुत्ते के काटने पर आजमाए जाने वाले ये पारंपरिक घरेलू टोटके मरीज को मौत के मुंह में धकेल सकते हैं। 

ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. मीर ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि कुत्ते की लार में रेबीज का घातक वायरस हो सकता है। हल्दी या तेल लगाने से न केवल घाव की सतह दूषित होती है, बल्कि सबसे अहम गोल्डन ऑवर में मिलने वाले चिकित्सीय इलाज में देरी हो जाती है, जो आगे चलकर लाइलाज साबित हो सकता है।

कुत्ता काटते ही तुरंत करें ये 4 प्राथमिक उपाय

डॉ. मीर के अनुसार किसी भी व्यक्ति को कुत्ता काटे तो घबराने के बजाय तत्काल वैज्ञानिक फर्स्ट एड अपनाना चाहिए। सबसे पहले पीड़ित को पानी के नल के पास ले जाएं और घाव को कपड़े धोने वाले साबुन या किसी भी सामान्य साबुन और बहते पानी की धार के नीचे लगातार 15 मिनट तक अच्छी तरह धोएं। जलन या दर्द होने के बावजूद धुलाई बंद न करें, क्योंकि पानी का तेज बहाव और साबुन का झाग वायरस के बाहरी आवरण को नष्ट कर लार की सांद्रता को काफी हद तक बहा देता है। 

घाव धोने के बाद उसे साफ कपड़े से थपथपाकर सुखाएं और डिटॉल, सैवलॉन या पोवीडोन आयोडीन जैसे मानक एंटीसेप्टिक लोशन लगाएं। घाव पर पट्टी बांधकर उसे कसें नहीं और न ही खुद से टांके लगाने की भूल करें, घाव को खुला रहने दें ताकि संक्रमण गहराई में न फैले।

सिर, गर्दन या चेहरे पर घाव हो तो तुरंत लें इम्युनोग्लोबुलिन

शरीर के संवेदनशील हिस्सों जैसे सिर, चेहरा, गला, गर्दन और उंगलियों पर कुत्ते के काटने के मामले बेहद गंभीर माने जाते हैं, क्योंकि इन अंगों की तंत्रिकाओं के जरिए रेबीज वायरस बहुत तेजी से दिमाग (सेंट्रल नर्वस सिस्टम) तक पहुंच जाता है। यदि कुत्ते के दांत त्वचा में गहराई तक धंसे हैं और खून निकला है, तो केवल रेबीज वैक्सीन (ARV) काफी नहीं होती। ऐसे मामलों में डॉक्टर घाव के ठीक आसपास रेबीज इम्युनोग्लोबुलिन (RIG) का इंजेक्शन लगाते हैं, जो वायरस को तुरंत निष्क्रिय करने का काम करता है। इसलिए बिना एक पल गंवाए उसी दिन नजदीकी सरकारी अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र पहुंचना अनिवार्य है।

कुत्ते पर 10 दिन निगरानी के फेर में न टालें टीका

समाज में यह भारी भ्रम फैला है कि अगर कुत्ता स्वस्थ दिख रहा है, तो 10 दिन तक उसकी गतिविधियों पर नजर रखनी चाहिए और टीका बाद में लगवा सकते हैं। विशेषज्ञ साफ करते हैं कि कुत्ते की 10 दिन की निगरानी पशु चिकित्सकों का विषय है, इसका यह कतई मतलब नहीं कि इंसान अपना इलाज रोक दे। रेबीज एक ऐसा जानलेवा संक्रमण है जिसका लक्षण एक बार शरीर में उभर आने के बाद दुनिया में कोई इलाज मौजूद नहीं है और मृत्यु दर शत-प्रतिशत होती है। हालांकि, समय पर वैक्सीन का पूरा कोर्स लेने से इस संक्रमण को पूरी तरह रोका जा सकता है। इसलिए कुत्ते को देखने या घाव सूखने का इंतजार किए बिना पहले दिन से ही टीकाकरण का पूरा शेड्यूल अनिवार्य रूप से पूरा करें।