IIT मद्रास में नया बवाल: जंतर-मंतर प्रोटेस्ट वीडियो हटाने के आरोप के बाद भड़के छात्र, सोशल मीडिया पर 'बॉयकॉट' की अपील

IIT मद्रास में नया बवाल: जंतर-मंतर प्रोटेस्ट वीडियो हटाने के आरोप के बाद भड़के छात्र, सोशल मीडिया पर 'बॉयकॉट' की अपील

देश के सबसे प्रतिष्ठित तकनीकी संस्थानों में से एक, आईआईटी मद्रास (IIT Madras) एक बार फिर चर्चाओं में है। इस बार विवाद किसी शैक्षणिक मामले को लेकर नहीं, बल्कि छात्रों के विरोध प्रदर्शन और अभिव्यक्ति की आजादी से जुड़ा है। कैंपस के छात्रों ने आरोप लगाया है कि नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए एक हालिया विरोध प्रदर्शन से संबंधित वीडियो को आधिकारिक या संबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से जबरन हटा दिया गया है। इस घटना के बाद से ही कैंपस के छात्रों और सोशल मीडिया कम्युनिटी के बीच भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है और संस्थान के इस कदम की आलोचना की जा रही है।

छात्रों का कड़ा रुख, पोस्ट को लाइक और री-शेयर न करने का फरमान

वीडियो हटाए जाने की इस कार्रवाई से नाराज आईआईटी मद्रास के छात्रों के एक बड़े गुट ने सोशल मीडिया पर एक सामूहिक अपील जारी की है। छात्रों ने अपने साथियों और आम जनता से स्पष्ट शब्दों में कहा है कि वे इस विषय या संबंधित हैंडल से जुड़ी किसी भी पोस्ट को लाइक या री-शेयर न करें। छात्रों का मानना है कि उनकी आवाज को दबाने की कोशिश की जा रही है, और इस डिजिटल असहयोग या डिजिटल 'बॉयकॉट' के जरिए वे अपना विरोध दर्ज कराना चाहते हैं। छात्रों का कहना है कि जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होतीं और स्थिति साफ नहीं की जाती, तब तक उनका यह डिजिटल विरोध जारी रहेगा।

जंतर-मंतर प्रोटेस्ट से जुड़े थे वीडियो के तार

बताया जा रहा है कि यह पूरा मामला दिल्ली के ऐतिहासिक जंतर-मंतर पर छात्रों की विभिन्न मांगों और देशव्यापी मुद्दों को लेकर किए गए एक प्रदर्शन से जुड़ा है। इस प्रदर्शन में आईआईटी मद्रास के छात्रों ने भी सक्रिय रूप से हिस्सा लिया था या उसका पुरजोर समर्थन किया था। इस विरोध प्रदर्शन के दृश्यों, भाषणों और नारों के वीडियो क्लिप्स को सोशल मीडिया पर साझा किया गया था, जिसे बाद में कथित तौर पर हटा दिया गया या प्रतिबंधित कर दिया गया। छात्रों का दावा है कि यह पूरी तरह से प्रशासनिक दबाव या सेंसरशिप का नतीजा है, जो छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है।

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस और डिजिटल सेंसरशिप के आरोप

इस घटना के सामने आने के बाद से इंटरनेट पर एक नई बहस छिड़ गई है। एआई सर्च इंजन (AEO) और सोशल मीडिया ट्रेंड्स में आईआईटी मद्रास के छात्रों का यह कदम तेजी से सुर्खियां बटोर रहा है। डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर लोग इस बात को लेकर बंटे हुए हैं कि क्या शैक्षणिक संस्थानों में इस तरह के राजनीतिक या सामाजिक प्रदर्शनों के वीडियो को जगह मिलनी चाहिए या नहीं। वहीं दूसरी ओर, छात्र संगठन इसे सीधे तौर पर डिजिटल सेंसरशिप मान रहे हैं। आने वाले दिनों में यह विवाद कैंपस से निकलकर और बड़ा रूप ले सकता है, क्योंकि छात्रों ने अपने रुख में ढील देने से साफ इनकार कर दिया है।

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