नंबर 1 से शून्य तक: क्यों बंद हो गए ब्लैकबेरी फोन, जानिए एक दिग्गज के अर्श से फर्श तक की पूरी कहानी
एक दौर था जब ब्लैकबेरी (BlackBerry) स्मार्टफोन होना समाज में प्रतिष्ठा का प्रतीक (Status Symbol) माना जाता था। उद्योगपतियों, राजनेताओं और युवाओं के हाथों में दिखने वाले ब्लैकबेरी ने अपने फिजिकल क्वर्टी (QWERTY) कीबोर्ड और सुरक्षित नेटवर्क से मोबाइल जगत पर राज किया। हालांकि, बदलते वक्त के साथ Apple के iPhone और Android स्मार्टफोन की बाजार में एंट्री हुई और धीरे-धीरे यह दिग्गज ब्रांड स्मार्टफोन की दौड़ से पूरी तरह बाहर हो गया।
आज ब्लैकबेरी स्मार्टफोन नहीं बनाता है, बल्कि उसने खुद को साइबर सुरक्षा और सॉफ्टवेयर बिजनेस में पूरी तरह ढाल लिया है। आइए जानते हैं पेजर से शुरू होकर QNX ऑपरेटिंग सिस्टम तक पहुंचे ब्लैकबेरी का पूरा सफर।
ऐसे बनी ब्लैकबेरी की खास पहचान
ब्लैकबेरी की शुरुआत स्मार्टफोन से नहीं, बल्कि पेजर व्यवसाय से हुई थी। इसके बाद जब कंपनी ने Pearl 8100 मॉडल बाजार में उतारा, तो इसने मोबाइल मार्केट में क्रांति ला दी। इसके बाद लॉन्च हुए Bold और Curve सीरीज के मॉडल्स ने कंपनी को हर वर्ग तक पहुंचा दिया।
इस लोकप्रियता के पीछे सबसे बड़ा हाथ था BlackBerry Messenger (BBM) का। उस दौर में BBM के जरिए आसानी से मैसेज भेजना युवाओं और कॉरपोरेट प्रोफेशन्स के बीच खासा लोकप्रिय हुआ, जिसने ब्लैकबेरी को घर-घर में स्थापित कर दिया।
2010 में सफलता का चरम: 2 करोड़ से ज्यादा अमेरिकी यूजर्स
साल 2008 में कंपनी ने Apple के iPhone को चुनौती देने के लिए अपना पहला टचस्क्रीन स्मार्टफोन BlackBerry Storm लॉन्च किया। हालांकि, यह फोन बाजार में ज्यादा कमाल नहीं दिखा सका।
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अमेरिका में दबदबा: साल 2010 में ब्लैकबेरी अपनी सफलता के चरम (Peak) पर था। उस वक्त अकेले अमेरिका में इसके 2 करोड़ से अधिक एक्टिव यूजर्स थे।
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वैश्विक पकड़: 2012 तक अमेरिका में भले ही इसके यूजर्स घटकर 1 करोड़ रह गए थे, लेकिन दुनिया भर में करीब 8 करोड़ (80 Million) लोग ब्लैकबेरी का इस्तेमाल कर रहे थे। इंडोनेशिया जैसे एशियाई बाजारों में इसका क्रेज काफी समय तक बरकरार रहा।
यहां से शुरू हुआ ब्लैकबेरी का पतन
2011 में पहली बार यूजर्स की संख्या के मामले में ब्लैकबेरी को Apple ने पीछे छोड़ दिया। यहीं से कंपनी की गिरावट तेजी से शुरू हुई। बाजार में टचस्क्रीन डिस्प्ले और मोबाइल एप्स (Apps) की मांग तेजी से बढ़ रही थी, लेकिन ब्लैकबेरी इस बदलाव को अपनाने में अपने प्रतिस्पर्धियों (iOS और Android) से काफी पिछड़ गया।
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Z3 और BlackBerry 10 की कोशिश: साल 2014 में कंपनी ने Z3 स्मार्टफोन और अपना नया BlackBerry 10 OS पेश करके भारत और वैश्विक बाजारों में वापसी की कोशिश की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
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मार्केट शेयर में भारी गिरावट: 2016 तक आते-आते अमेरिका में ब्लैकबेरी का स्मार्टफोन मार्केट शेयर 1% से भी कम रह गया, जबकि Apple का iOS अकेले 44% मार्केट शेयर पर कब्जा जमा चुका था।
स्मार्टफोन से साइबर सुरक्षा तक: QNX के जरिए नई शुरुआत
स्मार्टफोन बिजनेस में भारी गिरावट को देखते हुए कंपनी ने रणनीतिक फैसला लेते हुए हार्डवेयर निर्माण को पूरी तरह बंद कर दिया। कंपनी ने 2010 में अधिग्रहित की गई QNX सॉफ्टवेयर तकनीक और साइबर सुरक्षा (Cybersecurity) पर अपना पूरा ध्यान देना शुरू कर दिया।
आज ब्लैकबेरी का QNX एक रियल-टाइम ऑपरेटिंग सिस्टम (RTOS) है, जिसका उपयोग ऑटोमोटिव उद्योग में बड़े पैमाने पर हो रहा है। आज की आधुनिक और इलेक्ट्रिक गाड़ियों (EVs) के डिजिटल कंसोल और सुरक्षा प्रणालियों में QNX तकनीक का इस्तेमाल किया जाता है।
समय पर तकनीकी बदलाव न अपना पाने के कारण भले ही ब्लैकबेरी स्मार्टफोन बाजार से बाहर हो गया, लेकिन आज उसने सॉफ्टवेयर और सुरक्षा की दुनिया में अपनी एक मजबूत और नई पहचान बना ली है।