भारतीय रेलवे का बड़ा चमत्कार; पानी जैसी तकनीक से चलेगी ट्रेन, जानें एक किलोमीटर में कितना आएगा खर्च
भारतीय रेलवे के इतिहास में आज का दिन सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गया है। देश की पहली पर्यावरण अनुकूल 'हाइड्रोजन ट्रेन' (India's First Hydrogen Train) आखिरकार पटरियों पर दौड़ने के लिए पूरी तरह तैयार है, जिसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हरी झंडी दिखाकर रवाना कर दिया है। हरियाणा के जींद-सोनीपत रूट (Jind-Sonipat Rail Route) पर शुरू की गई यह स्वदेशी ट्रेन बिना किसी वायु प्रदूषण के सफर का एक क्रांतिकारी जरिया बनेगी।
तकनीक के मोर्चे पर आत्मनिर्भर भारत की यह एक ऐसी ऐतिहासिक कामयाबी है, जो देश में रेल यात्रा की पूरी तस्वीर को हमेशा के लिए बदलने का माद्दा रखती है। इस ट्रेन की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इससे कार्बन उत्सर्जन पूरी तरह से शून्य (Zero Carbon Emission) हो जाएगा।
डीजल-बिजली से भी आधी लागत: प्रति किलोमीटर आएगा सिर्फ ₹4 से ₹6 का खर्च
जब बात इस अत्याधुनिक ट्रेन को चलाने के दैनिक खर्च की आती है, तो इसके आंकड़े बेहद चौंकाने वाले और राहत देने वाले हैं। भारतीय रेलवे (Indian Railways) द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, पटरियों पर दौड़ते समय इस ट्रेन में प्रति किलोमीटर हाइड्रोजन ईंधन की परिचालन लागत (Operating Cost) मात्र 4 से 6 रुपये के बीच आती है।
पेट्रोल, डीजल या पारंपरिक बिजली से चलने वाले इंजनों के मुकाबले ये खर्च बेहद कम माना जा रहा है। यही वजह है कि भविष्य के परिवहन के लिए ग्रीन हाइड्रोजन को सबसे किफायती, टिकाऊ और सुरक्षित ईंधन माना जा रहा है। लंबी दूरी के रूटों पर इसके संचालन से रेलवे के सालाना बजट में भारी बचत होगी।
शुरुआती निर्माण लागत है भारी: एक नई ट्रेन पर खर्च हो रहे हैं ₹50 करोड़ तक
भले ही इस ट्रेन को रोज चलाने का खर्च बेहद मामूली हो, लेकिन इस नई और एडवांस तकनीक को अपनाने की शुरुआती विनिर्माण लागत (Initial Cost) काफी अधिक है। एक नई हाइड्रोजन ट्रेन को तैयार करने में करीब 41 से 50 करोड़ रुपये का खर्च आ रहा है, जो सामान्य डीजल ट्रेन की लगभग 27 करोड़ रुपये की निर्माण लागत से 20 से 30 प्रतिशत तक ज्यादा है। इसके अलावा, कुछ विशेष और प्रीमियम सुविधाओं से लैस पूरी रैक की अनुमानित कीमत 80 करोड़ रुपये तक पहुंच जाती है। हालांकि, ऑटोमोबाइल और रेलवे जानकारों का कहना है कि इसके लो-मेंटेनेंस (रख-रखाव में कम खर्च) और सस्ते ईंधन के कारण इसका लाइफटाइम कॉस्ट पारंपरिक ट्रेनों के मुकाबले बेहद कम बैठेगा।