पोषण पंचायत में बोलीं अर्चना चन्द्रा, कहा, कुपोषण से बचने के लिए पौष्टिक आहार जरूरी

बाल विकास सेवा एंव पुष्टाहार विभाग द्वारा नगर के एक लॉन में चतुर्थ राष्ट्रीय पोषण माह के अन्तर्गत "पोषण पंचायत" कार्यक्रम आयोजित किया गया।

महराजगंज। बाल विकास सेवा एंव पुष्टाहार विभाग द्वारा नगर के एक लॉन में चतुर्थ राष्ट्रीय पोषण माह के अन्तर्गत “पोषण पंचायत” कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में महिला आयोग की सदस्या अर्चना चन्द्रा द्वारा बच्चों को अन्नप्राशन कराया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि कुपोषण से बचाने के लिए पौष्टिक आहार जरूरी है। श्रीमती चंद्रा ने कहा कि गर्भवती को गर्भावस्था के दौरान अपने स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने की आवश्यकता है। पौष्टिक आहार से न केवल गर्भवती स्वस्थ रहेंगी बल्कि पैदा होने वाले बच्चे भी सेहतमंद होंगे। विभाग द्वारा संचालित योजनाओं का सही ढंग से संचालन किया जाए ताकि कुपोषण से मुक्ति मिल सके।

Nutrition Panchayat

“सही पोषण, देश रोशन” तथा “कुपोषण छोड़, पोषण की ओर,थामे भोजन की डोर” थीम पर आयोजित कार्यक्रम में उपस्थित आंगनबाडी कार्यकर्ताओं व सहायिकाओं से उन्होंने कहा कि गांव में घर-घर में जाकर कुपोषित बच्चों को चिन्हित करें तथा उन्हें कुपोषित से सुपोषित करने की विधियां बताएं। चिन्हित कुपोषित बच्चों को स्वस्थ करने के लिए पोषण पुनर्वास केन्द्र में भर्ती कराएं।

Nutrition Panchayat

आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का काम लोगों को घर-आंगन की साफ-सफाई एवं पोषण वाटिका से पौष्टिक आहार देना है। इस अवसर पर आयुर्वेदिक चिकित्सक डॉ.आशीष ने निरोग व स्वस्थ रहने के लिए योग के महत्व के बारे में बताया। इस अवसर पर जिला कार्यक्रम अधिकारी दुर्गेश कुमार, सीडीपीओ बृजेन्द्र जायसवाल, मनोज कुमार शुक्ला, विजय प्रकाश के अलावा आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व सहायिका मौजूद रहीं। कार्यक्रम का का संचालन मनोज कुमार ने किया।

कुपोषण के लक्षण

• उम्र के अनुसार शारीरिक विकास न होना।
• हमेशा थकान महसूस होना।
• कमजोरी लगना।
• अक्सर बीमार रहना।
• खाने-पीने में रूचि न रखना।

सुपोषण के दस मंत्र

• जन्म के दो घंटे के भीतर मां का गाढ़ा पीला दूध
• छह माह तक सिर्फ स्तनपान
• छह माह बाद ऊपरी आहार की शुरूआत
• छह माह से दो वर्ष तक ऊपरी आहार के साथ स्तनपान
• विटामिन ए, आयरन, आयोडिन, जिंक और ओआरएस का सेवन
• साफ-सफाई और खासतौर से हाथों की स्वच्छता
• बीमार बच्चों की देखरेख
• कुपोषित बच्चों की पहचान
• किशोरियों की देखभाल खासतौर से हीमोग्लोबिन की कमी न हो
• गर्भवती की देखभाल और उन्हें चिकित्सक के परामर्श के अनुसार आयरन-फोलिक का सेवन के
लिए प्रेरित करना

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