Up kiran,Digital Desk : बांग्लादेश में लंबे राजनीतिक उथल-पुथल के बाद अब लोकतांत्रिक प्रक्रिया फिर से रफ्तार पकड़ती नजर आ रही है। गुरुवार से देश में आम चुनाव के लिए आधिकारिक प्रचार शुरू हो गया है। 12 फरवरी को होने वाले इस चुनाव को बांग्लादेश के इतिहास के सबसे अहम चुनावों में से एक माना जा रहा है, क्योंकि यह पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद अंतरिम सरकार के तहत कराया जा रहा पहला राष्ट्रीय चुनाव है।
राजधानी ढाका समेत देश के विभिन्न हिस्सों में प्रमुख राजनीतिक दलों ने रैलियों और जनसभाओं के जरिए चुनावी माहौल बनाना शुरू कर दिया है। सड़कों पर पोस्टर, बैनर और नारों के साथ राजनीतिक सरगर्मी तेज होती जा रही है।
अंतरिम सरकार पर टिकी निगाहें
नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार ने निष्पक्ष और पारदर्शी चुनाव कराने का भरोसा दिलाया है। हालांकि अवामी लीग पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद सरकार की मंशा को लेकर सवाल भी उठ रहे हैं। कानून-व्यवस्था को लेकर भी चिंताएं बनी हुई हैं, लेकिन प्रशासन का दावा है कि मतदान शांतिपूर्ण ढंग से कराया जाएगा।
गौरतलब है कि शेख हसीना सरकार के खिलाफ हुए हिंसक जनआंदोलन के बाद 5 अगस्त 2024 को उन्हें देश छोड़ना पड़ा था। इसके बाद अंतरिम सरकार का गठन किया गया।
अवामी लीग बाहर, नए गठजोड़ मैदान में
अवामी लीग के चुनाव से बाहर होने के बाद राजनीतिक मैदान पूरी तरह बदला हुआ नजर आ रहा है। जमात-ए-इस्लामी 10 दलों के गठबंधन के साथ चुनावी रण में उतरी है और अपना जनाधार बढ़ाने की कोशिश कर रही है। हालांकि धर्मनिरपेक्ष दलों की ओर से जमात-ए-इस्लामी पर लगातार यह आरोप लगता रहा है कि उसकी विचारधारा बांग्लादेश की धर्मनिरपेक्ष नींव के खिलाफ है।
इस गठबंधन में छात्र आंदोलन से उभरी नई पार्टी नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) भी शामिल है, जिसने राजधानी ढाका से अपना प्रचार अभियान शुरू किया है।
तारिक रहमान बने प्रधानमंत्री पद के मजबूत दावेदार
इस चुनाव में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) के नेता तारिक रहमान को प्रधानमंत्री पद का सबसे मजबूत दावेदार माना जा रहा है। वे पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा जिया के पुत्र हैं और हाल ही में 17 साल के निर्वासन के बाद ब्रिटेन से बांग्लादेश लौटे हैं। खालिदा जिया का पिछले महीने निधन हो गया था, जिसके बाद पार्टी को सहानुभूति समर्थन मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
तारिक रहमान ने उत्तर-पश्चिमी शहर सिलहट से अपने चुनाव अभियान की शुरुआत की है और आने वाले दिनों में वे देश के कई अन्य जिलों में रैलियां करने वाले हैं।
नेशनल चार्टर पर भी जनता देगी राय
इस चुनाव के साथ-साथ जुलाई नेशनल चार्टर पर जनमत संग्रह भी कराया जाएगा। इस चार्टर पर देश की 52 पंजीकृत पार्टियों में से 25 ने हस्ताक्षर किए हैं। हालांकि अवामी लीग और कई अन्य दलों ने इसका विरोध किया है।
चार्टर के समर्थकों का कहना है कि इसे संविधान का हिस्सा बनाकर तानाशाही प्रवृत्तियों पर लगाम लगाई जा सकती है। इसमें राष्ट्रपति को अधिक अधिकार देने, प्रधानमंत्री की शक्तियों में संतुलन लाने, विधायकों के कार्यकाल की सीमा तय करने और भ्रष्टाचार, मनी लॉन्ड्रिंग व हितों के टकराव को रोकने जैसे प्रावधान शामिल हैं।
कुल मिलाकर, बांग्लादेश का यह चुनाव न सिर्फ सत्ता परिवर्तन की दिशा तय करेगा, बल्कि देश के भविष्य के राजनीतिक ढांचे पर भी गहरा असर डाल सकता है।
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