Up kiran,Digital Desk : बांग्लादेश की सियासत में आज एक नया सूरज उगा है। करीब दो दशक के लंबे इंतजार के बाद बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने सत्ता के गलियारों में जोरदार वापसी की है। बीएनपी सुप्रीमो तारिक रहमान ने मंगलवार को देश के नए प्रधानमंत्री के रूप में पद और गोपनीयता की शपथ ली। इस ऐतिहासिक शपथ ग्रहण समारोह में सबकी निगाहें रहमान की नई कैबिनेट पर टिकी थीं, जिसमें समावेशी राजनीति का संदेश देते हुए दो अल्पसंख्यक मंत्रियों को जगह दी गई है।
रहमान कैबिनेट का स्वरूप: 25 मंत्री और 24 राज्य मंत्रियों ने ली शपथ
राजधानी ढाका में आयोजित एक भव्य समारोह में तारिक रहमान ने प्रधानमंत्री पद की कमान संभाली। उनके साथ 25 कैबिनेट मंत्रियों और 24 राज्य मंत्रियों के जत्थे ने भी शपथ ली। नई सरकार के गठन में सबसे ज्यादा चर्चा उन दो चेहरों की हो रही है, जो अल्पसंख्यक समुदाय का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। इनमें अनुभवी राजनेता निताई रॉय चौधरी और दीपेन दीवान चकमा शामिल हैं। हालांकि, राजनीतिक गलियारों में कयास लगाए जा रहे थे कि दिग्गज हिंदू नेता गोयेश्वर रॉय को भी जगह मिल सकती है, लेकिन फिलहाल बाजी निताई रॉय और दीपेन के हाथ लगी है।
बीएनपी के चाणक्य निताई रॉय चौधरी ने जमात को दी शिकस्त
कैबिनेट में शामिल किए गए निताई रॉय चौधरी महज एक नेता नहीं, बल्कि बीएनपी के सबसे बड़े रणनीतिकारों में शुमार किए जाते हैं। 1949 में जन्मे निताई रॉय पेशे से वकील हैं और पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के संकटमोचक माने जाते हैं। उन्होंने मगुरा-2 संसदीय क्षेत्र से चुनाव लड़कर अपनी ताकत का लोहा मनवाया। दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने कट्टरपंथी दल जमात-ए-इस्लामी के उम्मीदवार मुस्तर्शीद बिल्लाह को सीधी टक्कर में करारी शिकस्त दी। निताई रॉय को 1,47,896 वोट मिले और उन्होंने 30,838 वोटों के बड़े अंतर से जीत दर्ज कर अपनी उपयोगिता साबित की।
रंगमती से दीपेन दीवान की ऐतिहासिक जीत
कैबिनेट के दूसरे अल्पसंख्यक मंत्री दीपेन दीवान चकमा समुदाय से आते हैं। उन्होंने दक्षिण-पूर्व के रंगमती जिले की कठिन सीट से शानदार जीत हासिल की है। दीपेन दीवान का कद इस क्षेत्र में काफी बड़ा माना जाता है। उन्होंने अपने सबसे निकटतम प्रतिद्वंद्वी, जो कि एक निर्दलीय उम्मीदवार थे, उन्हें भारी मतों से पराजित किया। हालांकि उनकी धार्मिक पहचान को लेकर अक्सर चर्चा रहती है, लेकिन वह चकमा एथनिक ग्रुप के एक मजबूत स्तंभ के रूप में उभरे हैं।
शपथ ग्रहण के साथ ही मोहम्मद यूनुस को दिया 'झटका'
सत्ता संभालते ही तारिक रहमान ने अपने तेवर साफ कर दिए हैं। नवनिर्वाचित सांसदों ने नेशनल पार्लियामेंट के साउथ प्लाजा में शपथ तो ली, लेकिन बीएनपी के सांसदों ने 'कॉन्स्टिट्यूशन रिफॉर्म काउंसिल' के सदस्य के तौर पर शपथ लेने से इनकार कर दिया। इसे मुख्य सलाहकार मोहम्मद यूनुस के लिए एक बड़े राजनीतिक झटके के तौर पर देखा जा रहा है। बीएनपी के इस रुख से साफ है कि आने वाले दिनों में देश की संवैधानिक व्यवस्था और सुधारों को लेकर सरकार और अंतरिम व्यवस्था के बीच टकराव की स्थिति बन सकती है।
क्या होगा अल्पसंख्यकों का भविष्य?
खालिदा जिया सरकार में करीब 30 साल पहले गोयेश्वर रॉय राज्य मंत्री थे, तब से अब तक गंगा में काफी पानी बह चुका है। तारिक रहमान द्वारा दो अल्पसंख्यक मंत्रियों को कैबिनेट में जगह देना अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी छवि सुधारने और देश के भीतर सभी वर्गों को साथ लेकर चलने की एक कोशिश मानी जा रही है। अब देखना यह होगा कि निताई रॉय और दीपेन दीवान अपनी नई जिम्मेदारी को किस तरह निभाते हैं और अल्पसंख्यक समुदाय की चिंताओं को सरकार के सामने कैसे रखते हैं।




