UP Kiran,Digital Desk: सऊदी अरब के पास परमाणु बम होने का दावा अब सार्वजनिक हो चुका है। यह जानकारी ईरान के इस्लामी क्रांतिकारी गार्ड (IRGC) के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी हुसैन कनानी मोघदम ने दी। अमेरिकी पत्रकार रिक सांचेज से बातचीत करते हुए मोघदम ने खुलासा किया कि सऊदी अरब के पास परमाणु हथियार हैं, जो कि दुनिया से छुपाए गए हैं। उनका कहना है कि सऊदी अरब ने यह छवि बनाई हुई है कि उसके पास परमाणु हथियार नहीं हैं, लेकिन वास्तविकता कुछ और ही है।
अमेरिका और इजरायल को भी है जानकारी
कनानी मोघदम के अनुसार, यह सिर्फ ईरान नहीं बल्कि अमेरिका और इजरायल को भी सऊदी अरब के परमाणु हथियारों के बारे में पता है। वह कहते हैं कि इन दोनों देशों के साथ सऊदी अरब इस मुद्दे पर लगातार बातचीत करता रहा है। खास बात यह है कि अमेरिका सऊदी से परमाणु हथियारों को सार्वजनिक रूप से स्वीकार करने के बदले इजरायल को मान्यता देने की शर्त रखता है। यह जानकारी अब्राहम अकॉर्ड के संदर्भ में सामने आई है, जिसमें इस मुद्दे पर चर्चा की गई थी।
अब्राहम अकॉर्ड और सऊदी अरब का परमाणु मुद्दा
अब्राहम अकॉर्ड, जो कि इजरायल और कुछ अरब देशों के बीच सामान्यीकरण समझौता था, उसमें भी सऊदी अरब के परमाणु हथियारों का जिक्र किया गया था। हुसैन कनानी मोघदम के मुताबिक, इस समझौते के दौरान अमेरिका और इजरायल ने यह शर्त रखी थी कि सऊदी अरब को परमाणु हथियारों के लिए छूट दी जाए, यदि वह अब्राहम अकॉर्ड पर हस्ताक्षर करता है।
कनानी मोघदम का कहना है कि इस दौरान यह तय हुआ था कि सऊदी अरब को परमाणु हथियारों की छूट दी जाएगी। हालांकि, बाद में यह बातचीत ठंडे बस्ते में चली गई और इस पर कोई ठोस निर्णय नहीं हो सका।
क्या सऊदी अरब का परमाणु हथियारों के प्रति रुझान नया है?
सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने पहले भी परमाणु हथियारों के प्रति अपने रुझान का संकेत दिया है। हालांकि, आधिकारिक तौर पर सऊदी अरब के पास कोई परमाणु हथियार नहीं हैं, लेकिन उनके बयान और कुछ रणनीतिक कदम यह दर्शाते हैं कि उनका रुझान परमाणु शक्ति की ओर है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सऊदी अरब का यह रुख मध्य-पूर्व क्षेत्र में एक नई परमाणु दौड़ का कारण बन सकता है। सऊदी ने पहले ही पाकिस्तान के साथ एक रक्षा समझौता किया है, जिसमें दोनों देशों के बीच आपसी सुरक्षा समझौतों का जिक्र है, जिसमें किसी भी देश पर हमले को दोनों देशों के खिलाफ माना जाएगा।
अब्राहम अकॉर्ड पर हस्ताक्षर क्यों नहीं हुए?
सऊदी अरब ने अब्राहम अकॉर्ड पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं, खासकर 2023 में इजरायल के गाजा पर हमले के बाद इस प्रक्रिया में रुकावट आई है। इजरायल और सऊदी अरब के बीच अब तक औपचारिक कूटनीतिक संबंध नहीं बन पाए हैं। इस वजह से अब्राहम अकॉर्ड की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी है।



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