बाहुबली अनंत सिंह का खेल खत्म? छिन गया बंगला, मंडराया जेल जाने का खतरा
मोकामा के बाहुबली नेता अनंत सिंह (छोटे सरकार) की सियासी जमीन एक बार फिर खिसकती नजर आ रही है। बिहार विधान परिषद (MLC) चुनाव में अपनी ही पार्टी जेडीयू के प्रत्याशी नीरज कुमार का खुला विरोध और जन सुराज पार्टी के कैंडिडेट अनुज सिंह का प्रचार करना उनके लिए जीवन का तीसरा सबसे बड़ा संकट बन गया है।
जेडीयू ने सख्त एक्शन लेते हुए उन्हें पार्टी से बाहर कर दिया है और विधानसभा अध्यक्ष से उनकी सदस्यता खत्म करने की मांग की है। वहीं, सम्राट चौधरी सरकार ने उनकी पत्नी व विधायक नीलम देवी को 20 सूत्री समिति से हटाकर 30 दिन के अंदर वह सरकारी बंगला खाली करने का अल्टीमेटम दे दिया है, जहां अनंत सिंह लंबे समय से अपना अस्तबल और बथान चलाते आ रहे हैं। बंगला और विधायिकी छिनने के साथ ही अब उनके सामने जेल जाने का सबसे बड़ा खतरा मंडरा रहा है।
दुलारचंद यादव हत्याकांड में मिली उनकी जमानत को रद्द करने की याचिका पर 30 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में अहम सुनवाई है। दुलारचंद के पोते की इस अपील पर राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर अनंत सिंह के आपराधिक इतिहास और चार्जशीट का पूरा ब्यौरा पेश कर दिया है। इससे पहले 2004 में एसटीएफ एनकाउंटर और 2019 में एके-47 बरामदगी मामले (जिसमें वह हाल ही में बरी हुए) में भी अनंत सिंह बड़े संकट झेल चुके हैं।
धुर विरोधी नीरज कुमार ने कसा तंज
अब उनके पुराने करीबी ललन सिंह और मंत्री अशोक चौधरी ने भी इस मामले से पूरी तरह किनारा कर लिया है। उनके धुर विरोधी नीरज कुमार ने तंज कसते हुए कहा है कि 'जब तक जेल में चना रहेगा, आना-जाना बना रहेगा।' ऐसे में साफ है कि अगर सुप्रीम कोर्ट में सरकार ने जरा भी सख्ती दिखाई, तो बाहुबली अनंत सिंह को एक बार फिर पटना की बेउर जेल लौटना पड़ सकता है।