नीतीश कुमार का ड्रीम प्रोजेक्ट पहली ही बारिश में ढेर: रमजान नदी सौंदर्यीकरण में ₹10 करोड़ पानी में बहे, भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप
बिहार के किशनगंज (Kishanganj) जिले से बुनियादी ढांचे और विकास योजनाओं की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल उठाने वाली एक बड़ी खबर सामने आई है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की महत्वाकांक्षी 'प्रगति यात्रा' के दौरान घोषित किए गए रमजान नदी सौंदर्यीकरण और कायाकल्प ड्रीम प्रोजेक्ट को पहली मानसूनी बारिश ने ही पूरी तरह से बेनकाब कर दिया है। लगभग 9.87 करोड़ रुपये (करीब ₹10 करोड़) की लागत से तैयार किए जा रहे इस प्रोजेक्ट की पेवर ब्लॉक सड़क और सुरक्षा दीवारें पहली ही तेज बारिश का दबाव नहीं झेल सकीं और भरभराकर ढह गईं। इस घटना के बाद स्थानीय जनता में भारी आक्रोश है और विपक्ष ने इसे 'भ्रष्टाचार का बहता पानी' बताते हुए जांच की मांग तेज कर दी है। आइए जानते हैं क्या था यह ड्रीम प्रोजेक्ट और पहली ही बारिश में कैसे बिखर गए सुशासन के दावे।
'मिनी मरीन ड्राइव' बनने से पहले ही ध्वस्त हुआ ढांचा
किशनगंज शहर के बीचों-बीच बहने वाली ऐतिहासिक रमजान नदी के अस्तित्व को बचाने, उसकी गाद निकालने (Disilting) और नदी के दोनों किनारों को खूबसूरत बनाने के लिए जल संसाधन विभाग द्वारा इस बड़ी परियोजना की शुरुआत की गई थी। स्थानीय स्तर पर लोग इसे शहर के 'मिनी मरीन ड्राइव' के रूप में देख रहे थे। परियोजना के तहत नदी के किनारों को पक्का कर वहां लोगों के टहलने के लिए शानदार पेवर ब्लॉक वाली सड़कें और बैठने के लिए घाट बनाए जा रहे थे। लेकिन केवल तीन महीने पहले ही तैयार की गई यह नई पेवर ब्लॉक सड़क मानसून की पहली ही तेज बौछार में बुरी तरह धंस गई और नदी के बहाव के साथ उसका एक बड़ा हिस्सा ताश के पत्तों की तरह पानी में बह गया।
मरम्मत के नाम पर लीपापोती, तकनीकी मानकों की अनदेखी के आरोप
घटिया निर्माण और प्रशासनिक लापरवाही का आलम यहीं नहीं रुका। जब सड़क धंसने और निर्माण टूटने की खबर फैली, तो निर्माण एजेंसी और जिम्मेदार अधिकारियों ने मामले को दबाने की कवायद शुरू कर दी। स्थानीय निवासियों और चश्मदीदों के मुताबिक, तकनीकी रूप से पूरे ढांचे को दोबारा मजबूत करने के बजाय, धंसे हुए हिस्सों पर केवल मिट्टी और बालू डालकर ऊपर से दोबारा पेवर ब्लॉक बिछाने की कोशिश की जा रही है। इस आनन-फानन में की जा रही मरम्मत ने विभागीय कार्यप्रणाली पर और भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि निर्माण के दौरान न तो मिट्टी की सही बाइंडिंग की गई और न ही पानी के तेज बहाव को रोकने के लिए रिटेनिंग वॉल (सुरक्षा दीवार) को पर्याप्त गहराई दी गई थी।
जनता के टैक्स के ₹10 करोड़ स्वाहा, उच्च स्तरीय जांच की मांग
यह नदी कभी शहर की पहचान और आकर्षण का केंद्र हुआ करती थी, जिसे दोबारा जीवित करने की उम्मीद में करोड़ों रुपये की यह योजना स्वीकृत हुई थी। परंतु पहली ही बारिश में हुए इस नुकसान के बाद स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं और नेताओं ने सीधे जल संसाधन विभाग और ठेकेदार के नेक्सस पर उंगली उठाई है। मांग की जा रही है कि पूरे प्रोजेक्ट के मैटेरियल की विजिलेंस जांच (Vigilance Inquiry) कराई जाए और जनता की गाढ़ी कमाई का पैसा पानी में बहाने वाले दोषियों पर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाए। बिहार में लगातार पुलों और सरकारी इंफ्रास्ट्रक्चर के ढहने की खबरों के बीच रमजान नदी का यह मामला सरकार की छवि के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है।