अब किसी के सिर पर नहीं होगी छत की कमी, बिहार सरकार का ये ऐतिहासिक कदम जानकर चौंक जाएंगे आप

अब किसी के सिर पर नहीं होगी छत की कमी, बिहार सरकार का ये ऐतिहासिक कदम जानकर चौंक जाएंगे आप

बिहार सरकार ने राज्य के हजारों बेघर और भूमिहीन परिवारों को उनका अपना घर बनाने का सपना साकार करने की दिशा में एक ऐतिहासिक और क्रांतिकारी कदम उठाया है। राज्य सरकार ने शनिवार को 'अभियान बसेरा-2' के तहत प्रदेश के 5,446 पात्र भूमिहीन परिवारों को आवास निर्माण के लिए सरकारी जमीन का बंदोबस्ती प्रमाण-पत्र (Parcha) औपचारिक रूप से सौंपा।

प्रत्येक लाभार्थी परिवार को अपना स्थायी मकान बनाने के लिए तीन डिसमिल (लगभग 1,306 वर्गफीट) जमीन का भूखंड उपलब्ध कराया गया है, जिससे वर्षों से अपने सिर पर छत का इंतजार कर रहे हजारों परिवारों को एक नया जीवन और संबल मिला है।

बेघर परिवारों को मिलेगी छत: 3 डिसमिल जमीन पर बनेगा सपनों का आशियाना

राज्य सरकार की इस कल्याणकारी योजना का मुख्य उद्देश्य प्रदेश के उन सीमांत और गरीब परिवारों को वासभूमि उपलब्ध कराना है, जिनके पास रहने के लिए अपना खुद का कोई भूखंड नहीं था। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के अधिकारियों का कहना है कि तीन डिसमिल जमीन मिलने के बाद अब ये परिवार प्रधानमंत्री आवास योजना या राज्य सरकार की अन्य योजनाओं की मदद से पक्के घर का निर्माण करा सकेंगे। विभाग के अनुसार, यह पहल न केवल बेघर लोगों को सामाजिक सुरक्षा प्रदान करेगी, बल्कि उन्हें समाज में सम्मानजनक जीवन जीने का अधिकार भी देगी।

गया और नालंदा जिले रहे अव्वल: जानें किस जिले में कितने परिवारों को मिला लाभ

राजस्व विभाग द्वारा जारी जिलेवार आंकड़ों के मुताबिक, इस अभियान के तहत गया जिले में सबसे अधिक 407 भूमिहीन परिवारों को जमीन का अधिकार पत्र दिया गया है। इसके अलावा नालंदा में 378, राजधानी पटना में 363, औरंगाबाद में 296, बांका में 282, कटिहार में 222, बेगूसराय में 210 और किशनगंज में 209 पात्र परिवारों को वासभूमि के बंदोबस्ती प्रमाण-पत्र वितरित किए गए। अन्य जिलों में भी राजस्व अधिकारियों की देखरेख में योग्य लाभार्थियों के बीच जमीन के कागजात बांटे गए।

15 अगस्त तक 30 हजार परिवारों को जमीन देने का बड़ा लक्ष्य

राज्य सरकार ने यह साफ कर दिया है कि यह कल्याणकारी अभियान यहीं खत्म नहीं होगा। सरकार ने 15 अगस्त तक राज्य भर के 30,000 पात्र भूमिहीन परिवारों को वासभूमि उपलब्ध कराने का बड़ा और महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है। इस समयबद्ध लक्ष्य को हासिल करने के लिए सभी जिलाधिकारियों (DM) और अंचलाधिकारियों (CO) को स्पष्ट निर्देश दिए गए हैं कि वे प्राथमिकता के आधार पर जमीन का चिह्नांकन करें और वास्तविक हकदारों तक इसका लाभ पहुंचाना सुनिश्चित करें।

Latest Posts