तेज प्रताप की वकील निशा सिंह ने गिरफ्तारी को बताया गैर-कानूनी, सेहत का हवाला देकर मांगी जमानत

तेज प्रताप की वकील निशा सिंह ने गिरफ्तारी को बताया गैर-कानूनी, सेहत का हवाला देकर मांगी जमानत

बिहार की राजनीति और मीडिया गलियारों में उस समय सरगर्मी अचानक बढ़ गई, जब तेज प्रताप यादव (Tej Pratap Yadav) से जुड़े मामले में उनकी कानूनी टीम ने अदालती मोर्चे पर एक बड़ा कदम उठाया। तेज प्रताप की पैरवी कर रही वरिष्ठ वकील निशा सिंह (Advocate Nisha Singh) ने अदालत के समक्ष अपनी दलीलें पेश करते हुए पुलिस द्वारा की गई हालिया कार्रवाई को पूरी तरह से गैर-कानूनी और वैधानिक प्रक्रियाओं के विपरीत बताया है। इसके साथ ही, तेज प्रताप की बिगड़ती सेहत और मेडिकल हिस्ट्री का हवाला देते हुए अदालत से उन्हें तुरंत अंतरिम या नियमित जमानत (Bail Application) देने की पुरजोर मांग की गई है। इस कानूनी कदम के बाद राजनीतिक गलियारों में आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। आइए जानते हैं कि अदालत में तेज प्रताप की वकील ने क्या दलीलें दी हैं और पुलिस की कार्रवाई पर क्या गंभीर सवाल उठाए हैं।

प्रक्रियाओं का उल्लंघन और मनमानी: वकील निशा सिंह की अदालत में दलील

अदालत कक्ष में जमानत याचिका पर बहस करते हुए अधिवक्ता निशा सिंह ने जांच एजेंसी और स्थानीय पुलिस की कार्यप्रणाली को कठघरे में खड़ा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि तेज प्रताप की गिरफ्तारी के दौरान दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC/BNSS) के तहत निर्धारित अनिवार्य दिशा-निर्देशों का खुलेआम उल्लंघन किया गया है।

निशा सिंह ने कहा कि न तो आरोपी को उनके कानूनी अधिकारों के प्रति समय पर सचेत किया गया और न ही गिरफ्तारी के ठोस आधारों से अवगत कराया गया। उन्होंने अदालत से कहा:

"यह गिरफ्तारी कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए नहीं, बल्कि राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित होकर हेडलाइंस बटोरने के लिए की गई है। जब मेरे मुवक्किल जांच में हर तरह से सहयोग करने के लिए तैयार हैं, तो उन्हें हिरासत में लेने का कोई कानूनी औचित्य नहीं बनता। यह सीधे तौर पर उनके मौलिक अधिकारों का हनन है।"

खराब सेहत और मेडिकल हिस्ट्री का दिया हवाला, कोर्ट से राहत की उम्मीद

जमानत अर्जी में सबसे ज्यादा जोर तेज प्रताप के स्वास्थ्य और उनकी वर्तमान शारीरिक स्थिति पर दिया गया है। वकील ने अदालत के सामने मेडिकल रिपोर्ट्स और डॉक्टरों के पर्चे पेश करते हुए बताया कि तेज प्रताप पिछले कुछ समय से गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं, जिसके लिए उन्हें निरंतर चिकित्सीय देखरेख और विशेष खान-पान की आवश्यकता होती है।

दलील दी गई कि जेल या पुलिस हिरासत के तनावपूर्ण माहौल में रहने से उनकी सेहत और ज्यादा बिगड़ सकती है, जिससे उनकी जान को भी खतरा हो सकता है। स्वास्थ्य के आधार पर (Humanitarian and Medical Grounds) कोर्ट से सहानुभूति पूर्वक विचार करने और तुरंत राहत देने की अपील की गई है।

राजनीतिक बयानबाजी तेज, समर्थक और विरोधी आमने-सामने

इस हाई-प्रोफाइल मामले के सामने आने के बाद से राज्य में राजनीतिक पारा चढ़ गया है। तेज प्रताप के समर्थकों और उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने इसे सत्ता पक्ष की एक सोची-समझी साजिश करार दिया है और सड़कों पर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने की चेतावनी दी है।

दूसरी तरफ, विपक्षी और विरोधी खेमे के नेताओं का कहना है कि कानून सबके लिए बराबर है और जांच एजेंसियों को अपना काम पूरी स्वतंत्रता से करने देना चाहिए। अदालत ने दोनों पक्षों की शुरुआती दलीलें सुनने के बाद केस डायरी और मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट तलब की है, जिसके बाद ही जमानत याचिका पर अंतिम फैसला आने की उम्मीद है।

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