बिहार में जहरीली शराब से चार मौत और मुजफ्फरपुर में अवैध दारू बरामद
बिहार में शराबबंदी के तमाम दावों के बीच एक बार फिर प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। राजधानी के पास और सूबे के विभिन्न जिलों में जहरीली शराब (Spurious Liquor) के सेवन से चार लोगों की दर्दनाक मौत होने की खबर सामने आई है। इस घटना के बाद से स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है और राजनीतिक गलियारों में भी उबाल आ गया है। मृतक के परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है, वहीं प्रशासन की कार्यशैली कटघरे में खड़ी हो गई है।
दूसरी ओर, उत्पाद विभाग और पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मुजफ्फरपुर जिले में एक बड़े अवैध शराब के जखीरे का भंडाफोड़ किया है। पुलिस ने छापेमारी के दौरान करीब 14 लाख रुपये मूल्य की अवैध विदेशी और देसी शराब जब्त की है। लगातार सामने आ रही इन घटनाओं ने यह साबित कर दिया है कि तमाम सख्ती के बावजूद धड़ल्ले से अवैध शराब का कारोबार चल रहा है।
राजधानी के करीब जहरीली शराब त्रासदी से मचा हड़कंप
बिहार की राजधानी क्षेत्र से सटे इलाकों में जहरीली शराब पीने से चार लोगों की मौत की पुष्टि के बाद सनसनी फैल गई है। शुरुआती रिपोर्ट्स के अनुसार, इन सभी ने संदिग्ध परिस्थितियों में जहरीली शराब का सेवन किया था, जिसके कुछ ही घंटों बाद उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। उल्टी, सिरदर्द और आंखों की रोशनी जाने जैसी गंभीर शिकायत के बाद जब तक परिजनों उन्हें अस्पताल पहुँचाते, तब तक कई लोग दम तोड़ चुके थे।
इस घटना के बाद से स्थानीय नागरिकों में भारी गुस्सा व्याप्त है। लोगों का आरोप है कि पुलिस और एक्साइज विभाग की मिलीभगत के बिना इतनी बड़ी मात्रा में जहरीली शराब की बिक्री संभव नहीं है। विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरना शुरू कर दिया है और प्रशासनिक लापरवाही का आरोप लगाया है। पीड़ित परिवारों ने सरकार से उचित मुआवजे और दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
मुजफ्फरपुर में पुलिस की बड़ी कार्रवाई, ₹14 लाख की दारू जब्त
एक तरफ जहाँ जहरीली शराब ने कई घरों के चिराग बुझा दिए हैं, वहीं दूसरी तरफ मुजफ्फरपुर पुलिस ने अवैध शराब के कारोबारियों के खिलाफ बड़ी सफलता हासिल की है। गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए पुलिस टीम ने एक ठिकाने पर ताबड़तोड़ छापेमारी की। इस दौरान मौके से भारी मात्रा में छुपाकर रखी गई अवैध शराब बरामद की गई, जिसका बाजार मूल्य करीब 14 लाख रुपये आंका गया है।
पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि सूबे में पूर्ण शराबबंदी कानून को सख्ती से लागू करने के लिए लगातार एंटी-लिकर अभियान चलाए जा रहे हैं। मुजफ्फरपुर में पकड़ी गई इस भारी खेप से यह स्पष्ट होता है कि तस्कर पुलिस की नजरों से बचने के लिए नए-नए तौर-तरीके अपना रहे हैं। हालांकि, इस मामले में संलिप्त मुख्य सरगनाओं की तलाश में पुलिस की कई टीमें जुटी हुई हैं और आसपास के इलाकों में लगातार सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है।
शराबबंदी कानून और मैदानी हकीकत के बीच बढ़ती चुनौतियां
बिहार सरकार द्वारा साल 2016 में राज्य में शराब की बिक्री और सेवन पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया था। सरकार का दावा है कि इस कानून से समाज में सुधार आया है, लेकिन आए दिन होने वाली जहरीली शराब से मौतें (Hooch Tragedies) इन दावों की पोल खोलती नजर आती हैं। मैदानी हकीकत यह है कि तमाम पाबंदियों के बाद भी अवैध शराब माफियाओं का नेटवर्क ग्रामीण और शहरी इलाकों में सक्रिय है।
सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह एक बड़ी चुनौती बन चुका है कि कैसे इस अवैध सिंडिकेट को पूरी तरह से नेस्तनाबूद किया जाए। जानकारों का मानना है कि केवल प्रशासनिक छापों से इस अवैध कारोबार पर पूरी तरह रोक नहीं लगाई जा सकती, इसके लिए स्थानीय स्तर पर खुफिया तंत्र को और अधिक मजबूत करना होगा तथा भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों पर भी कड़ा एक्शन लेना होगा, तभी आम जनता की जान बचाई जा सकती है।